अकोला- जिला परिषद शिक्षकों के तबादला प्रकरण में लंबे समय से चल रही जांच के बाद जिला परिषद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 33 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनय नावंदर ने बुधवार को निलंबन के आदेश जारी किए। संबंधित शिक्षकों को आदेश भेज दिए गए हैं। वहीं 66 शिक्षकों की वेतनवृद्धि रोके जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं, हालांकि प्रशासन ने फिलहाल ऐसी किसी कार्रवाई से इनकार किया है।जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष सामान्य तबादला प्रक्रिया के दौरान कुछ शिक्षकों पर फर्जी दिव्यांग, दूरी तथा चिकित्सकीय प्रमाणपत्रों के आधार पर श्रेणी-1, श्रेणी-2 और श्रेणी-3 में तबादले का लाभ लेने का आरोप लगा था। इस मामले को लेकर विधायक हरीश पिंपले ने राज्य सरकार से शिकायत कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे के निर्देश पर तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनीता मेश्राम ने माध्यमिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनय नावंदर ने 33 शिक्षकों के निलंबन के आदेश जारी किए।
प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रतनसिंह पवार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल 33 शिक्षकों को निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन के प्रचलित नियमों में इस प्रकरण में वेतनवृद्धि रोकने का प्रावधान नहीं है, इसलिए ऐसी चर्चाएं सही नहीं हैं।
निलंबित शिक्षकों के नाम
- चंद्रशेखर द्वारकाप्रसाद दीक्षित
- कु. श्वेता हेमंतराव खुमकर
- संतोष महादेव पाचपोर
- वंदना रंगलाल राठोड
- रविंद्र महादेव ढोकणे
- कु. वैशाली रामराव लोणकर
- स्वप्नाली पोतदार
- सीमा नजम मोहम्मद इब्राहिम
- मोहम्मद फैसल शेख भोलू अंसारी
- आशा उत्तमराव मालधुरे
- संदीप सहदेव महल्ले
- विजय दामोदर भांडे
- प्रेमा मोहनप्रसाद दुबे
- सोनल चंद्रकांत पाऊलझगडे
- प्रतिभा विजय भांडे
- महेंद्र सुधाकर धनौकार
- विद्या सुनील आखरे
- नरेंद्र किसनराव इंगळे
- शीतल नागोराव टापरे
- देवानंद आनंदराव मोरे
- उज्वला नरेंद्र इंगळे
- कु. मनीषा रामेश्वर सूर्यवंशी
- रेणुका साहेबराव बाबर
- कृपाली शेंडोकार
- वर्षा नागसेन गोपनारायण
- इमरान हुसैन इरफान हुसैन
- भारती अविनाश वसिनिक
- रुपाली नितिन मालोदे
- वैदेही विनोद वैद्य
- वैशाली लक्ष्मणराव देशमुख
- मनीषा काकड
- दीपाली जाधव
- मीनाक्षी आपोनीकर
इस कार्रवाई को जिला परिषद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तबादला कराने के मामलों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। मामले में आगे भी विभागीय जांच जारी रहने की संभावना है।




