जमीन का पहले होगा भू-मापन, फिर रजिस्ट्री; कागजात भी होंगे डिजिटल

मुंबई- राज्य सरकार जमीन से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल करने की तैयारी में है। जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी, मालिकाना हक को लेकर विवाद और भू-मापन में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है। राज्य सरकार दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र में भूमि स्वामित्व (लैंड टाइटलिंग) विधेयक लाएगी। इसके साथ ही ‘बैकलॉग ऑफ पेंडिंग’ कार्य को भी पूरा करने की तैयारी है।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य जमीन से संबंधित सभी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। इस दौरान विकास खरे, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर और भूमि अभिलेख अपर मुख्य निदेशक शैलेश नवाल मौजूद थे।

भूमि स्वामित्व कानून के बाद क्या बदलेगा?

भूमि स्वामित्व कानून लागू होने के बाद जमीन का क्षेत्रफल, मालिकाना हक, लेन-देन से जुड़ी जानकारी और जरूरी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। फिलहाल जमीन से जुड़े काम के लिए 7/12, भू-मापन, पार्टी कार्ड और रजिस्ट्री जैसी अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। नई व्यवस्था में इन सभी जानकारियों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा।

जमीन को मिलेगी डिजिटल पहचान

शहरों में बहुमंजिला इमारतों के फ्लैट, दुकान और अन्य यूनिट की संपत्ति की स्पष्ट पहचान करने के लिए भी डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई जाएगी। इससे संबंधित यूनिट का क्षेत्रफल और मालिकाना हक स्पष्ट रूप से दर्ज किया जा सकेगा।

जमीन की पूरी जानकारी एक ही डेटाबेस में

सरकारी जमीन की पूरी जानकारी भी डिजिटल डेटाबेस में दर्ज की जाएगी। इसमें यह जानकारी उपलब्ध होगी कि किसी जिले, तहसील या शहर में कितनी सरकारी जमीन उपलब्ध है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। इससे सरकारी जमीन से संबंधित जानकारी हासिल करना आसान होगा।

500 लैंड सर्वेयर होंगे तैनात

भू-मापन में तेजी लाने के लिए राज्य में 500 लैंड सर्वेयर (भू-मापक) नियुक्त किए गए हैं। इन्हें तीन महीने का प्रशिक्षण दिया गया है। नागरिकों के आवेदन के 15 दिन के भीतर भू-मापन का प्रयास किया जाएगा।

जमीन विवाद 10% तक घटाने का लक्ष्य

राज्य सरकार को उम्मीद है कि डिजिटल रिकॉर्ड और जमीन की स्पष्ट पहचान से अगले तीन साल में जमीन विवादों में 10% तक कमी आएगी। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि सरकारी जमीन में भ्रष्टाचार रोकने के लिए भी डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी साबित होगा।

खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी और मालिकाना विवाद पर लगेगी लगाम

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जमीन की खरीद-फरोख्त के समय जमीन के मालिकाना हक और रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आएगी। इससे फर्जी दस्तावेजों और एक ही जमीन को लेकर होने वाले विवादों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण आसान होगा

राज्य के करीब 21% भू-भाग पर वन क्षेत्र है। विकास परियोजनाओं और वन संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय के लिए भी डिजिटल जमीन रिकॉर्ड मददगार होंगे। उपलब्ध जमीन का पूरा आंकड़ा डिजिटल होने से जमीन की कमी के कारण परियोजनाओं में होने वाली देरी और अड़चन की संभावना कम होगी।

‘यूनिक प्रॉपर्टी कोड’ देने की तैयारी

जमीन की डिजिटल पहचान के लिए यूनिक प्रॉपर्टी कोड देने की व्यवस्था की जा रही है। इसके जरिए जमीन की जानकारी एक ही पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इससे जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और लेन-देन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होने की उम्मीद है।

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