नई दिल्ली- देश के बड़े शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी के बीच घर खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है। महंगी जमीन, बढ़ती निर्माण लागत और प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों के कारण नौकरीपेशा लोगों और दूसरे शहरों से आने वाले परिवारों के लिए अपना घर खरीदना आसान नहीं है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग घर खरीदने के बजाय किराए के मकान में रहना पसंद करते हैं। हालांकि, महानगरों और बड़े शहरों में किफायती किराए पर अच्छा और सुरक्षित मकान ढूंढना भी अब किसी चुनौती से कम नहीं है।
पढ़ाई, नौकरी, रोजगार या काम की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर आने वाले लोगों की इसी परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के तहत किफायती किराए के मकान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इस योजना के अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग (ARH) घटक के जरिए ऐसे लोगों को कम किराए पर रहने की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, जिन्हें शहरों में स्थायी रूप से घर खरीदने की जरूरत या क्षमता नहीं है।
क्या है प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0?
PMAY-U 2.0 केंद्र सरकार की शहरी आवास पहल है, जिसके तहत पात्र लोगों को आवास से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग (ARH) व्यवस्था उन लोगों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, जो शहरों में काम या अन्य कारणों से अस्थायी अथवा सीमित अवधि के लिए रहते हैं।इसका उद्देश्य सिर्फ कम किराए पर मकान उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि लोगों को साफ-सुथरा, सुरक्षित और बुनियादी सुविधाओं से युक्त आवास उपलब्ध कराना भी है।
किन लोगों को मिल सकता है फायदा?
अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग व्यवस्था में समाज के ऐसे वर्गों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिन्हें शहरों में किफायती आवास की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- EWS और LIG वर्ग के लोग
- दूसरे शहरों से आने वाले शहरी प्रवासी
- बेघर और जरूरतमंद लोग
- औद्योगिक श्रमिक
- कामकाजी महिलाएं
- निर्माण श्रमिक
- स्ट्रीट वेंडर
- रिक्शा चालक
- छोटे सेवा प्रदाता
- संविदा कर्मचारी और अन्य जरूरतमंद शहरी कामगार
इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है, जिन्हें नौकरी या रोजगार के कारण शहर में रहना पड़ता है, लेकिन महंगे किराए के कारण बेहतर आवास लेना मुश्किल होता है।
सिर्फ मकान नहीं, बुनियादी सुविधाएं भी
सरकार की योजना के तहत रेंटल हाउसिंग परिसर में केवल कमरे या मकान उपलब्ध कराने पर ही जोर नहीं है। इन परिसरों में रहने वालों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जानी है।राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होगी। आवासीय परिसरों में जरूरत के अनुसार पीने का पानी, सीवर या सेप्टेज प्रबंधन, साफ-सफाई, सड़क, सामुदायिक केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और क्रेच जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।इसके अलावा परिसर के आसपास छोटी दुकानों और अन्य जरूरी व्यावसायिक सुविधाओं को भी विकसित करने का प्रावधान हो सकता है। इससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग को लागू करने के लिए सरकार ने दो प्रमुख मॉडल की व्यवस्था की है।
पहला मॉडल: खाली सरकारी मकानों का इस्तेमाल
पहले मॉडल के तहत सरकार या सार्वजनिक एजेंसियों द्वारा पहले से बनाए गए लेकिन खाली पड़े आवासों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन मकानों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) या सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से किफायती किराए के आवास में बदला जा सकता है।इससे एक तरफ पहले से मौजूद खाली आवासों का उपयोग होगा, वहीं दूसरी तरफ शहरों में कम किराए वाले घरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
दूसरा मॉडल: नए रेंटल हाउसिंग परिसर
दूसरे मॉडल के तहत सार्वजनिक और निजी संस्थाओं की भागीदारी से नए किफायती किराए के आवास विकसित किए जा सकते हैं। इन परिसरों को खास तौर पर EWS, LIG, प्रवासी श्रमिकों और अन्य जरूरतमंद लोगों की आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा सकता है।
शहरों में रहने वाले प्रवासियों के लिए बड़ी राहत
शहरों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों और दूसरे राज्यों से आने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए किराए का मकान सबसे बड़ी मासिक लागतों में से एक होता है। खासकर महानगरों में वेतन का बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता है।ऐसे में यदि ARH के तहत पर्याप्त संख्या में किफायती और अच्छी सुविधाओं वाले मकान उपलब्ध होते हैं, तो इससे कम आय वाले परिवारों और कामगारों पर किराए का आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
क्यों जरूरी है ऐसी योजना?
शहरीकरण बढ़ने के साथ शहरों में आवास की मांग भी लगातार बढ़ रही है। वहीं कम आय वाले लोगों के लिए बाजार दर पर मकान खरीदना या किराए पर लेना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में किफायती किराए के आवास की व्यवस्था शहरों में रहने वाले कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
PMAY-U 2.0 के ARH घटक का फोकस ऐसे ही लोगों को शहरों में सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराने पर है। हालांकि, किसी व्यक्ति को वास्तव में किराए का मकान कब और किस दर पर मिलेगा, यह संबंधित शहर, उपलब्ध आवास, राज्य/स्थानीय निकाय की व्यवस्था और पात्रता पर निर्भर करेगा।




