महाराष्ट्र में सिंथेटिक पनीर की बिक्री पर एक साल की रोक

मुंबई- खाद्य मिलावट पर सख्ती करते हुए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने राज्यभर में एनालॉग (कृत्रिम/गैर-डेयरी) पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है।मंगलवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a), 18 और 29 के तहत जारी किया गया है। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम का उद्देश्य खाद्य मिलावट पर रोक लगाना और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।

यह निर्णय भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा में लगातार कृत्रिम पनीर के बढ़ते इस्तेमाल का मुद्दा उठाने के बाद लिया गया। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उपभोक्ताओं को खाद्य धोखाधड़ी से बचाने में मदद मिलेगी।

एफडीए ने राज्यभर में निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाएं, क्लाउड किचन और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में यदि एनालॉग पनीर का उपयोग या भंडारण पाया जाता है तो संबंधित संस्थानों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर सामान जब्त किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज होगा।

खुले पनीर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की

अधिसूचना के अनुसार, असली डेयरी पनीर बनाने वाले निर्माताओं को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लेबलिंग एंड डिस्प्ले) रेगुलेशंस, 2020 का पालन करना होगा। बिना बैच नंबर, बिल या उचित पैकेजिंग वाले खुले पनीर के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना, उत्पाद जब्ती और गैर-अनुरूप उत्पादों को नष्ट करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।एफडीए के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच जांचे गए 308 पनीर और डेयरी उत्पादों के नमूनों में से 109 (35.4 प्रतिशत) निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 79 नमूने निम्न गुणवत्ता के और 30 नमूने मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में दूध की प्राकृतिक वसा की जगह सस्ते वनस्पति तेल और गैर-डेयरी वसा का इस्तेमाल किया जा रहा था। एफडीए ने कहा कि कृत्रिम पनीर में वह पोषण, विशेषकर प्रोटीन, नहीं होता जिसकी उपभोक्ता, खासकर शाकाहारी लोग, असली पनीर से अपेक्षा करते हैं। इसी कारण पूरे राज्य में इस पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।

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