मुंबई- महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लेने की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य में किसानों को अपने बीज संग्रह करने, उपयोग करने, आपस में आदान-प्रदान करने और (बिना ब्रांड नाम के) बेचने का कानूनी अधिकार देने के लिए एक स्वतंत्र बीज कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।मंत्रालय में आयोजित बैठक में इस कानून को लेकर कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए। यह कदम किसानों को कानूनी सुरक्षा देने, गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने और खराब बीज मिलने पर तुरंत मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
यह पहल महाराष्ट्र विधानमंडल के 2025 के दूसरे मानसून सत्र में दिए गए आश्वासन के तहत की जा रही है, जिसमें बीज कानून 1966 में संशोधन और सुधार का प्रस्ताव रखा गया था।बैठक में कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए, जिनमें राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल, विधायक सुधीर मुनगंटीवार, सईताई डहाके, राजेश बकाने, हेमंत ओगले, रणधीर सावरकर, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे और कृषि संचालक सुनील बोरकर शामिल थे।
प्रस्तावित कानून की मुख्य बातें:
- किसानों को बीज पर अधिक अधिकार और सुरक्षा
- खराब बीज पर तत्काल मुआवजा देने की व्यवस्था
- बीज की गुणवत्ता की जिम्मेदारी संबंधित कंपनियों पर तय करना
- नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई
- हर जिले में बीज शिकायत निवारण केंद्र स्थापित करना
- ‘साथी’ पोर्टल पर प्रमाणित (ट्रुथफुल) बीजों का पंजीकरण
- कृषि विश्वविद्यालयों के शोध कार्य के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान
सरकार का कहना है कि वह किसानों के लिए मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बीज व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।इस प्रस्तावित कानून से किसानों को बीज के मामले में अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।




