मुंबई- महाराष्ट्र भीषण गर्मी का कहर जारी है। विदर्भ में तो हालात इस तरह है कि मानो जैसे सूरज आग उगल रहा है। अकोला में देश में सबसे अधिक 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि नागपुर समेत विदर्भ के अन्य हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, महाराष्ट्र के कई हिस्सों में ‘हीटवेव’ का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए सार्वजनिक आरोग्य विभाग, महाराष्ट्र शासन ने एक विस्तृत स्वास्थ्य एडवायजरी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बढ़ती गर्मी न केवल थकान पैदा करती है, बल्कि यह जानलेवा लू (Heatstroke) का कारण भी बन सकती है।आज का अधिकतम तापमान 45.2 रहा l
हीट स्ट्रोक से होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। सरकार ने अपील की है कि अगर आपको या किसी और को हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या है हीट स्ट्रोक के लक्षण?
- चक्कर आना
- सिरदर्द
- मतली (उल्टी जैसा महसूस होना)
- ज़्यादा प्यास लगना
- पेशाब कम आना
- सांस लेने में तकलीफ और दिल की धड़कन तेज होना
क्या है बचाव के उपाय ?
- हाइड्रेशन है जरूरी: प्यास न लगी हो तब भी बार-बार पानी पिएं। घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ रखें।
- देसी पेय का सहारा: ओआरएस (ORS) के साथ-साथ नींबू पानी, छाछ, लस्सी और तरबूज जैसे पानी से भरपूर फलों का सेवन करें।
- पहनावा: हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय छाता या टोपी का प्रयोग करें।
- आपातकालीन नंबर: किसी भी गंभीर स्थिति या बेहोशी की हालत में तुरंत 108 या 102 नंबर पर कॉल करें।
क्या न करें: इन गलतियों से बचें
- प्रशासन ने दोपहर 12 से 3 के बीच बाहर निकलने और कड़ी मेहनत वाले काम करने से बचना है।
- चाय, कॉफी, शराब और अधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करने करें। क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी (Dehydration) को बढ़ाते हैं।
- नंगे पैर बाहर जाने और पार्क की गई गाड़ियों में बच्चों या पालतू जानवरों को न जाने दें।
- दोपहर के समय खुले आसमान के नीचे काम न करें।
- ज़्यादा प्रोटीन वाले खाने से बचें, और बासी खाना न खाएं।
- मजदूरों और मालिकों के लिए विशेष निर्देश
कामकाजी जगहों पर छायादार स्थान और ठंडे पानी की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। भारी काम करने वाले मजदूरों को हर एक घंटे के बाद कम से कम 5 मिनट का विश्राम देने का निर्देश दिया गया है।
क्या है इसके लक्षण ?
| क्रमांक | वयस्कों में | बच्चों में |
|---|---|---|
| 1 | मानसिक स्थिति में बदलाव, जिसमें भटकाव, भ्रम और चिड़चिड़ापन शामिल है। | खाना खाने से मना करना। |
| 2 | अटैक्सिया (असंतुलन), दौरे पड़ना, या कोमा की स्थिति में चले जाना। | बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापनद्ध |
| 3 | त्वचा का गर्म, लाल और सूखा होना। | पेशाब कम आना। |
| 4 | शरीर का मुख्य तापमान ≥40°C या 104°F | मुंह और त्वचा का सूखापन, और आंखों में आंसू न आना / आंखें धंसी हुई लगना। |
| 5 | सिर में तेज़ दर्द (धड़कन जैसा) | सुस्ती / प्रतिक्रिया देने में बदलाव होना। |
| 6 | घबराहट, चक्कर आना, बेहोशी और सिर हल्का महसूस होना। | शरीर में अकड़न होना। |
| 7 | मांसपेशियों में कमज़ोरी या ऐंठन होना। | शरीर के किसी भी हिस्से से खून बहना। |
| 8 | जी मिचलाना और उल्टी होना। | – |
| 9 | दिल की धड़कन तेज़ होना / सांस लेने में तकलीफ़ होना। | – |
किसी की तबीयत बिगड़े ताे क्या करें?
महाराष्ट्र सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, या वह बेहोश, भ्रमित दिखाई देता है या उसे पसीना आना बंद हो गया है, तो तुरंत 108 या 102 पर कॉल करें। इंतज़ार करते समय, व्यक्ति के शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करें। यदि संभव हो, तो उसे किसी ठंडी जगह पर ले जाएं। उसकी त्वचा के ज्यादा से ज्यादा हिस्से पर ठंडा पानी लगाएं, या उसे ठंडे पानी में भिगोए हुए कपड़े से ढक दें; और यह सुनिश्चित करें कि व्यक्ति को हवा मिलती रहे या वह पंखे की हवा के संपर्क में रहे।




