पुराने जमीन रिकॉर्ड में बदलाव से पहले लेनी होगी मंजूरी,अब केवल तकनीकी गलतियां ही सुधारी जा सकेंगी

मुंबई- राजस्व विभाग ने तहसीलदारों को महाराष्ट्र जमीन राजस्व संहिता, 1966 की धारा 155 के तहत मिले अधिकारों पर अंकुश लगाया है।सरकार ने पुराने जमीन रिकॉर्ड में मनमाने बदलाव की संभावना रोकने के लिए इन अधिकारों को सीमित किया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि, अब कलम 155 का इस्तेमाल केवल साधारण लेखन, या तकनीकी गलतियां सुधारने के लिए किया जा सकेगा।नए आदेश के अनुसार, पांच साल से अधिक पुराने जमीन के रिकॉर्डों में सुधार के लिए तहसीलदारों को संबंधित प्रांताधिकारी की पूर्व अनुमति लेनी होगी। इसी तरह नगर भूमापन अधिकारी और उपअधीक्षक भूमिअभिलेख को जिला अधीक्षक भूमिअभिलेख की अनुमति लेना आवश्यक होगा।

सरकारी जमीनों पर भी लागू नहीं

सरकारी विभागों, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं और राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीनों के रिकॉर्ड सुधारने के लिए कलम 155 के तहत अधिकार नहीं दिए जाएंगे। ऐसी जमीनों के लिए अलग सरकारी प्रक्रिया का पालन करना होगा, जहां कानून में अलग से सुधार की प्रक्रिया या कलम 247 अथवा 257 के तहत अपील और पुनरीक्षण का प्रावधान है, वहां कलम 155 का आधार लेकर नोंद में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।

जमीन के अधिकारों में बदलाव पर रोक

राजस्व विभाग के संज्ञान में आया था कि कुछ मामलों में महाराष्ट्र जमीन राजस्व संहिता की धारा 155 का इस्तेमाल कर मूल आदेश या जमीन रिकॉर्ड के वास्तविक आशय में बदलाव करने का प्रयास किया जा रहा था। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने धारा 155 के इस्तेमाल को सीमित करने का निर्णय लिया है।अब इस प्रावधान के तहत जमीन रिकॉर्ड में केवल साधारण लेखन संबंधी त्रुटियों या तकनीकी गलतियों को ही सुधारा जा सकेगा। किसी रिकॉर्ड के मूल स्वरूप, अधिकार या आदेश के आशय को बदलने के लिए धारा 155 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।राजस्व विभाग का उद्देश्य जमीन रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनाए रखना और अनधिकृत बदलाव की संभावनाओं को रोकना है। नए निर्देशों से पुराने रिकॉर्ड में मनमाने तरीके से बदलाव करने की प्रक्रिया पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

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