मुंबई- महाराष्ट्र सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग से सूचना एवं जनसंपर्क और राजशिष्टाचार को अलग कर दो नए स्वतंत्र विभाग बनाने की मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया,जिससे राज्य में प्रशासनिक विभागों की कुल संख्या बढ़कर 46 हो गई है। मंत्रालय के विभिन्न विभागों के कामकाज में समन्वय लाने के उद्देश्य से पिछली मंत्रिमंडल बैठक में 33 विभागों के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई थी, जिससे इनकी संख्या 45 हो गई थी। अब नए निर्णय के बाद यह संख्या 46 हो गई है। इस पुनर्गठन से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने और कामकाज में सुसंगति आने की उम्मीद है।
कौन से विभाग बने स्वतंत्र ?
इस व्यापक पुनर्गठन के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण विभाजन किए गए हैं। कृषि और पशुधन विभाग को दो अलग विभागों में बांटा गया है। सहकारिता, विपणन और वस्त्रोद्योग विभाग के तीन स्वतंत्र विभाग बनाए गए हैं। गृह विभाग से परिवहन विभाग को अलग किया गया है।उद्योग, ऊर्जा, श्रम और खनिकर्म विभाग को तीन भागों में विभाजित किया गया है। राजस्व और वन विभाग से तीन स्वतंत्र विभाग बनाए गए हैं, जिसमें भूअर्जन का विषय अब राजस्व विभाग के अंतर्गत रहेगा। स्कूल शिक्षा एवं खेल, पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य तथा चिकित्सा शिक्षण विभागों का भी विभाजन किया गया है।
33 विभागों को 46 विभागों में बदला
- कृषि व पदुम विभाग, पहले एक थे, अब स्वतंत्र सहकार, पणन व वस्त्रोद्योग पहले एक थे, अब तीनों अलग
- सामान्य प्रशासन विभाग में से राजशिष्टाचार एवं सूचना व जनसंपर्क को 2 स्वतंत्र विभाग बनाए गए
- गृह विभाग से अब ट्रांसपोर्ट अलग
- उद्योग, ऊर्जा, कामगार व खनिज पहले एक थे, अब उद्योग-खनिज मिलाकर एक और ऊर्जा व कामगार दो अलग इस तरह 3 नए विभाग
- राजस्व व वन पहले एक थे, अब दोनों अलग, इसमें मदत व पुनर्वास मिलाकर तीन स्वतंत्र विभाग
- भूसंपादन पहले वन के अधीन था, अब राजस्व को दे दिया गया
- स्कूली शिक्षा और खेल पहले एक थे, अब दोनों अलग
- पर्यटन व सांस्कृतिक कार्य पहले एक थे, अब दोनों अलग
- वैद्यकीय शिक्षण व फूड एंड ड्रग्स का भी विभाजन, अब अन्न व औषध प्रशासन विभाग अलग
- नियोजन से रोजगार गारंटी योजना हटाया, मृद व जलसंधारण विभाग में शामिल




