FMCG उत्पादों के दाम फिर बढ़ने के आसार

इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों पर दबाव; कीमत बढ़ाने के साथ ‘श्रिंकफ्लेशन’ का भी सहारा

नई दिल्ली : देश में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है। जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां चालू जुलाई-सितंबर तिमाही में उत्पादों के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई थीं।इस बार कंपनियां सीधे कीमतें बढ़ाने के अलावा ‘श्रिंकफ्लेशन’ का रास्ता भी अपना सकती हैं। इसमें उत्पाद की कीमत समान रखी जाती है, लेकिन पैकेट में उसकी मात्रा या वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों के मुताबिक पाम ऑयल, चीनी और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उत्पादन लागत बढ़ रही है।

हिंदुस्तान यूनिलीवर बढ़ा सकती है 2 से 5% कीमत

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड अपने विभिन्न प्रोडक्ट कैटेगरी की कीमतों में 2 से 5 फीसदी तक बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। कंपनी की ओर से लागत में बढ़ोतरी को देखते हुए सितंबर तिमाही में कीमतों में बदलाव की संभावना जताई गई है।

गोदरेज को क्रूड के स्थिर होने का इंतजार

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में औसतन 5 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई थीं। कंपनी फिलहाल चालू तिमाही में तत्काल बड़ी कीमत वृद्धि से बच रही है और कमोडिटी बाजार के स्थिर होने का इंतजार कर रही है।कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति के अनुसार, गोदरेज के कई उत्पादों की इनपुट कॉस्ट कच्चे तेल से जुड़ी है। यदि ब्रेंट क्रूड 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो बड़े प्राइस हाइक की आवश्यकता नहीं होगी।

डाबर ने जताई लागत बढ़ने की आशंका

डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा के अनुसार, कच्चे माल की बढ़ती लागत का दबाव आने वाले दिनों में भी बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनियों के सामने बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालने के अलावा सीमित विकल्प रह जाते हैं। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी का असर उत्पादों की बिक्री और वॉल्यूम पर पड़ सकता है।

टाटा कंज्यूमर और नेस्ले की भी नजर

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के एमडी सुनील डी’सूजा के अनुसार, लागत का असर लगातार बदल रहा है। जरूरत पड़ने पर कंपनी आगे कीमतों में बदलाव कर सकती है।वहीं, नेस्ले इंडिया ने अपने निवेशक प्रस्तुतीकरण में अल्पावधि में खपत थोड़ी सुस्त रहने की आशंका जताई है। कंपनी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मानसून पर अल नीनो के संभावित प्रभाव को फूड एंड बेवरेज सेक्टर के लिए चिंता का विषय बताया है।

प्रीमियम उत्पादों पर कंपनियों का जोर

कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद एफएमसीजी कंपनियों को शहरी और ग्रामीण बाजारों में खपत बने रहने की उम्मीद है। कंपनियां लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और प्रीमियम उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। इसके जरिए वित्त वर्ष 2026-27 में मार्जिन को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

क्या है श्रिंकफ्लेशन?

जब किसी उत्पाद की कीमत बढ़ाए बिना उसके पैकेट में मौजूद मात्रा या वजन कम कर दिया जाता है, तो इसे श्रिंकफ्लेशन कहा जाता है। इससे उपभोक्ता को समान कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन उसे पहले की तुलना में कम मात्रा में उत्पाद मिलता है।

क्या है इनपुट कॉस्ट और अल नीनो?

इनपुट कॉस्ट में किसी उत्पाद को तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, ईंधन, परिवहन और मजदूरी आदि पर होने वाला खर्च शामिल होता है। इन लागतों में वृद्धि होने पर कंपनियों के मुनाफे का मार्जिन प्रभावित होता है और वे कीमतें बढ़ाने का फैसला कर सकती हैं।अल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की मौसमी-जलवायु घटना है। इसका असर वैश्विक मौसम पर पड़ सकता है और भारत में मानसून कमजोर होने की स्थिति में कृषि उत्पादन तथा खाद्य वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।

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