
अमरावती- भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) ने अमरावती के जिला गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक श्री. विराग आनंदराव देशमुख को 70 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक विभाग से संपर्क कर बताया था कि संबंधित अधिकारी उनके कृषि सेवा केंद्र से विभिन्न कंपनियों के उर्वरकों के नमूने जांच के लिए न लेने तथा पहले से लिए गए नमूनों को प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु न भेजने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता रिश्वत देने के इच्छुक नहीं थे, इसलिए उन्होंने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की।शिकायत प्राप्त होने के बाद 13 जून 2026 को विभाग ने पंचों की उपस्थिति में मांग की सत्यता की जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि निरीक्षक विराग देशमुख ने पहले से लिए गए दो उर्वरक नमूनों के लिए 40 हजार रुपये तथा अन्य दो कंपनियों के उर्वरक नमूने न लेने के लिए 30 हजार रुपये की मांग की थी। इस प्रकार कुल 70 हजार रुपये रिश्वत के रूप में मांगे गए थे।इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने योजनाबद्ध ढंग से जाल बिछाकर कार्रवाई की। आरोपी अधिकारी ने अपने निजी वाहन में शिकायतकर्ता से 70 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की।
उसी समय विभाग की टीम ने उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया।आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है तथा उनके विरुद्ध गाडगे नगर पुलिस स्टेशन में प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बापू नगर तथा अपर पुलिस अधीक्षक सचिन्द्र शिंदे के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्रवाई का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक सुनील किनगे ने किया। इस अभियान में पुलिस निरीक्षक रविंद्र सहारे सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने अमरावती, अकोला, वाशिम, यवतमाल तथा बुलढाणा जिलों के नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई शासकीय अधिकारी, कर्मचारी अथवा उनके माध्यम से कोई निजी व्यक्ति किसी शासकीय कार्य के बदले वैधानिक शुल्क के अतिरिक्त रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को दें। प्राप्त शिकायतों पर शीघ्र एवं कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अकोला कृषि विभाग की भी हो ACB जांच!
खाद, बीज, जैव-उत्तेजक (बायो-स्टिमुलेंट) और अनुदान से जुड़े मामलों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब अकोला कृषि विभाग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो रही है। हाल ही में राज्य में कृषि विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एसीबी द्वारा जांच शुरू किए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अकोला जिले में भी कृषि योजनाओं, लाइसेंस, निरीक्षण और अनुदान वितरण की निष्पक्ष जांच क्यों न हो।



