
जिन चालकों को मराठी नहीं आती उन्हें 15 अगस्त तक मराठी बोलचाल के ज्ञान के लिए समय दिया गया है। गौरतलब रिक्शा टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य होने संबंधी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के आदेश के बाद हंगामा मच गया था।
संगठनों ने मांगा था वक्त
बड़ी संख्या में परप्रांतिय रिक्शा टैक्सी चालकों को 1 मई से उनका लायसेंस परमिट छिन जाने के डर से अफरातफरी का माहौल बन गया था। इसे लेकर सोमवार को मंत्रालय में एक बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें यूनियनों एवं हिंदी भाषा नेताओं ने वक्त मांगा था। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस मुद्दे पर यूनियन के पदाधिकारियों एवं हिंदी भाषी नेताओं के साथ बैठक भी हुई। 1 मई से उनके ऊपर सख्ती न करते हुए उन्हें मराठी सीखने के लिए कम से कम 6 माह का समय मांगा गया था। जिस पर रिक्शा टैक्सी चालकों को 3 माह का समय दिया गया है।
1 मई से पूरे राज्य में RTO इंस्पेक्शन कैंपेन
मंगलवार को बांद्रा में नए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के ऑफिस में सभी रीजनल और सब-रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर्स के साथ मीटिंग कर परिवहन मंत्री ने कहा कि 1 मई से पूरे राज्य में एक स्पेशल इंस्पेक्शन कैंपेन चलाया जाएगा ताकि राज्य में रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लाइसेंस को पूरी तरह से वेरिफाई किया जा सके। इस कैंपेन में ड्राइवरों के लाइसेंस, बैच और दूसरे परमिट चेक किए जाएंगे, और यह भी रिव्यू किया जाएगा कि उन्हें मराठी की प्रैक्टिकल जानकारी है या नहीं।
यदि इंस्पेक्शन के दौरान नकली डॉक्यूमेंट्स पाए जाते हैं या यह पाया जाता है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है, तो संबंधित ड्राइवरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जो मराठी नहीं बोल सकता, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके उलट, ऐसे ड्राइवरों को गाइड किया जाएगा और बेसिक लेवल की मराठी सीखने में मदद की जाएगी। यह कैंपेन 15 अगस्त तक चलेगा, और बाद की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



