HTBT बीज! मिट्टी, मवेशी और बाजार तीनों पर संकट

मुंबई-  महाराष्ट्र में प्रतिबंधित HTBT (Herbicide Tolerant Bt Cotton) बीज को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। एक ओर कृषि विभाग सख्ती के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इसके दुष्परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। विशेषज्ञों और किसानों से मिली जानकारी के अनुसार, HTBT बीज के साथ उपयोग किए जाने वाले खरपतवार नाशकों (हर्बीसाइड) का असर केवल खरपतवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव मिट्टी, पशुओं और पूरे कृषि तंत्र पर पड़ने लगा है।

“खेत में छिड़का जहर कहीं थाली तक तो नहीं पहुंच रहा?

ग्लाइफोसेट यह एक शक्तिशाली खरपतवार नाशक है, HTBT खेती में ज्यादा उपयोग होता है International Agency for Research on Cancer ने इसे संभावित कैंसरकारी बताया है किसान का कहना है कि इस तकनीक के साथ खेतों में डाले जाने वाले शक्तिशाली खरपतवार नाशक के कारण जमीन पर उगने वाली सामान्य घास भी प्रभावित हो रही है। पहले जो घास पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होती थी,  लेकिन अब मवेशी भी उसे नहीं खा रहे और जो खा रहे होंगे उनसे निकलने वाले दूध पर क्या प्रभाव होता होंगा यह भी सोचने का विषय है । वही भविष्य में चारे की कमी का खतरा भी पैदा हो सकता है ।

 मिट्टी की उर्वरता पर खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार और अंधाधुंध हर्बीसाइड के उपयोग से मिट्टी की पोषक क्षमता (fertility) पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मिट्टी के सूक्ष्म जीव (micro-organisms) प्रभावित होते हैं जमीन की प्राकृतिक उर्वरता धीरे-धीरे कम हो सकती है. लंबे समय में उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका  कई कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भविष्य में भूमि की उत्पादकता घटने का खतरा बढ़ सकता है।

फिर भी किसान HTBT बीज क्यों चुन रहा है?

इन खतरों के बावजूद किसान HTBT बीज की ओर आकर्षित हो रहे हैं, इसके पीछे मुख्य कारण आर्थिक और श्रम से जुड़े हैं:

 मजदूरों की कमी: निराई-गुड़ाई के लिए मजदूर आसानी से उपलब्ध नहीं
लागत में कमी: हर्बीसाइड के उपयोग से श्रम लागत घट जाती है
समय की बचत: एक बार छिड़काव करने से खेत साफ हो जाता है यानी, अल्पकालिक लाभ के चलते किसान दीर्घकालिक जोखिम को नजरअंदाज कर रहे हैं।

बाजार में अवैध HTBT बीज की एंट्री की तैयारी पूरी 

सख्त प्रतिबंधों के बावजूद, बाजार में गुजरात , तेलंगाना , आंध्र प्रदेश से  HTBT बीज की अवैध सप्लाई हो रही है

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार:

  • बिना नाम और ब्रांड के पैकेट में बीज बेचे ने के लिए मार्केट में पहुचने वाले है
  • कई जगह लोकल दुकानों से बिना बिल के गुप्त बिक्री भी सुरु है
  • अवैध एजेंटों के माध्यम से गांव-गांव तक सप्लाई पहुंचा ने की योजना है  यह पूरा नेटवर्क राज्य प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है

जिम्मेदारी किसकी?

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है।

किसान: जानकारी के अभाव और मजबूरी में बीज खरीद रहे हैं
दुकानदार/एजेंट: बिना अनुमति के बिक्री कर रहे हैं
प्रशासन: निगरानी और नियंत्रण में कमी के आरोप लग रहे

 सरकार के लिए चेतावनी

HTBT बीज का बढ़ता उपयोग अब सिर्फ कृषि मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरण और भविष्य की खेती के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है।

यदि समय रहते: अवैध बिक्री पर रोक नहीं लगी और किसानों को सही जानकारी और विकल्प नहीं दिए गए तो आने वाले वर्षों में इसका असर मिट्टी, उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट दिखाई देगा। HTBT बीज का मुद्दा अब “आसान खेती बनाम सुरक्षित खेती” के बीच की लड़ाई बन चुका है।
जहां एक ओर किसान तत्काल लाभ देख रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके दीर्घकालिक दुष्परिणाम धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। सरकार, प्रशासन और कृषि तंत्र के लिए यह समय है—सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सही मार्गदर्शन देने का, ताकि किसान और खेती दोनों सुरक्षित रह सकें।

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