
पुरानी व्यवस्था से क्यों परेशान थे आदिवासी किसान?
अब तक की व्यवस्था के अनुसार, वनपट्टाधारक आदिवासी किसानों का नाम मुख्य सातबारा के अधिकार अभिलेख में केवल ‘अन्य अधिकार’ के कॉलम में दर्ज किया जाता था। मालिकाना हक स्पष्ट न होने के कारण इन किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता था।इन्हें न तो आधिकारिक किसान आईडी मिल पाती थी और न ही बैंक से आसानी से कृषि ऋण मिल पाता था। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मिलने वाली सरकारी राहत और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ उठाने में भी इन्हें प्रशासनिक और कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ता था।
‘नमूना 7ई’ और ’12ई’ से कैसे बदलेगी तस्वीर?
आदिवासियों की इसी बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने विशेष नमूना 7ई और गांव नमूना 12ई लागू करने का फैसला किया है।
- नमूना 7ई (Form 7E): इसमें वन भूमि के वास्तविक लाभार्थी (आदिवासी किसान) का नाम मुख्य धारक के रूप में दर्ज होगा।
- गांव नमूना 12ई (Form 12E): इस फॉर्म में किसान द्वारा जमीन पर उगाई जाने वाली फसलों का पूरा रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से रखा जाएगा।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, आदिवासी किसानों को फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), AgriStack और अन्य डिजिटल कृषि सेवाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिल सकेगा।
सर्वे के बाद रिकॉर्ड होगा दर्ज
वन ब्लॉक क्षेत्र की जमीनों का भूमि अभिलेख विभाग सर्वे करेगा। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित जमीन का रिकॉर्ड नए नमूनों में दर्ज किया जाएगा।
विपक्ष ने किया स्वागत
विपक्षी दल कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार और नाना पटोले ने महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। सरकार ने ग्राम वनाधिकार समितियों के पुनर्गठन पर भी सकारात्मक रुख जताया।



