इस नई टेक्नोलॉजी का नाम ‘न्यूक्लियर थर्मल एंड न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रॉपल्शन’ है। सरल भाषा में समझें तो नासा ह्यूमन मार्स मिशन के लिए एक ऐसा रॉकेट बनाने जा रहा है, जिसमें परमाणु ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा।
दो तकनीकों की मदद से बनेगा रॉकेट
दूसरी तकनीक का नाम है न्यूक्लियर इलेक्ट्रिक प्रॉपल्शन। इसमें न्यूक्लियर रिएक्टर आयन इंजन को इलेक्ट्रिसिटी देता है, जिससे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनती है। यह फील्ड जेनॉन जैसी गैसों को रफ्तार देती है, जिससे रॉकेट को आगे बढ़ने की गति मिलती है। इस सिस्टम को बनाने की कोशिश भी 2003 और 2005 में की जा चुकी है।
दोगुनी होगी रॉकेट की परफॉर्मेंस
नई टेक्नोलॉजी के जरिए वैज्ञानिक रॉकेट की परफॉर्मेंस को तकरीबन दोगुना कर सकेंगे। रॉकेट बनाने का यह कॉन्सेप्ट फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में हाइपरसोनिक्स प्रोग्राम एरिया लीड प्रोफेसर रेयान गोसे ने दिया है। इसका पहला फेज डेवलप करने के लिए उनके साथ 13 और लोगों को रिसर्च में शामिल किया गया है। प्रोजेक्ट के लिए 12.5 हजार डॉलर यानी 10 लाख 18 हजार रुपए की शुरुआती रकम भी दे दी गई है।
इंसानों के लिए मार्स पर जाना होगा आसान
नई तकनीक के जरिए मार्स पर जाने की राह आसान हो जाएगी। पृथ्वी से मंगल तक का सफर सिर्फ 6.5 हफ्ते का होगा, जिससे मिशन की लागत में कमी आएगी और वक्त में इजाफा होगा। स्पेस की माइक्रोग्रैविटी में लोगों को सेहत से जुड़ी परेशानियां होने का खतरा भी कम होगा। नासा का यह रॉकेट बनकर कब तैयार होगा, फिलहाल इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है।