नाशिक – सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गोशाला के अनुदान के लिए ‘ना हरकत’ प्रमाणपत्र देने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में पशुसंवर्धन विभाग के अधिकारी डॉ. प्रशांत धर्माधिकारी को लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग ने गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, संत जनार्दन स्वामी सेवा संस्कारित संस्था की गोशाला में 70 देशी गायें हैं। सरकार की ओर से गोशाला के लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपये का अनुदान मंजूर किया गया था। इस अनुदान के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र और अनुमति देने के बदले डॉ. धर्माधिकारी ने कथित तौर पर 41 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
बाद में बातचीत के दौरान पांच हजार रुपये लेने पर सहमति बनी। इसके बाद संस्था के विश्वस्तों ने लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग से शिकायत की। शिकायत के आधार पर उपअधीक्षक स्वाती पवार, निरीक्षक राहुल कुमार नाईक और उनकी टीम ने जाल बिछाकर डॉ. धर्माधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।बताया जा रहा है कि डॉ. धर्माधिकारी की सेवानिवृत्ति में केवल एक महीना बाकी था। धार्मिक संस्था और गोशाला के अनुदान में रिश्वत मांगने की घटना सामने आने से इलाके में भारी चर्चा और नाराजगी का माहौल है।




