मुंबई/अकोला- महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान डीएपी खाद की संभावित कमी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से वैकल्पिक खादों का उपयोग करने की अपील की है। कृषि आयुक्तालय, पुणे द्वारा जारी निर्देश में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण डीएपी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे मांग के समय किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में हर साल लगभग 44 लाख मीट्रिक टन रासायनिक खादों का उपयोग होता है, जिसमें डीएपी, यूरिया, एमओपी और एसएसपी प्रमुख हैं। विभाग ने कहा कि डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है, लेकिन इसकी जगह अन्य खादों का उपयोग कर फसल को आवश्यक पोषक तत्व दिए जा सकते हैं।
विभाग ने किसानों को विशेष रूप से एसएसपी (Single Super Phosphate) और टीएसपी (Triple Super Phosphate) जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी है। जानकारी के मुताबिक एसएसपी में सल्फर और अन्य सूक्ष्म तत्व भी पाए जाते हैं, जो फसलों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। वहीं, टीएसपी में 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होने से यह डीएपी का प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।
कृषि विभाग ने सभी जिला कृषि अधिकारियों और कृषि विकास अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के बीच वैकल्पिक खादों के उपयोग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि खरीफ सीजन में खाद संकट की स्थिति से बचा जा सके।




