Saturday, October 31, 2026

अमरावती में खुलेगी देश की पहली स्वदेशी फ्लाइंग अकेडमी, DGCA से हरी झंडी

बेलोरा एयरपोर्ट पर 10 एकड़ में तैयार हो रहा अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, 34 विमानों से दी जाएगी पायलटों को ट्रेनिंग ,पहले बैच में 180 कैडेट्स को मिलेगा प्रवेश, 18 महीने का होगा सीपीएल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

अमरावती : भारतीय विमानन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की दिशा में अमरावती के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। एयर इंडिया को अमरावती के बेलोरा एयरपोर्ट पर फ्लाइंग अकेडमी स्थापित करने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की ओर से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस अकेडमी के शुरू होने से महाराष्ट्र सहित देशभर के युवाओं को कमर्शियल पायलट बनने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होगी।

बताया जा रहा है कि यह भारत में किसी स्वदेशी एयरलाइन कंपनी की ओर से स्थापित की जाने वाली पहली फ्लाइंग अकेडमी होगी। महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी और टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया संयुक्त रूप से इस परियोजना को विकसित कर रही हैं। बेलोरा एयरपोर्ट परिसर में लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में इस प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिसर का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

10 एकड़ में अत्याधुनिक प्रशिक्षण परिसर

फ्लाइंग अकेडमी में कैडेट्स के प्रशिक्षण और रहने के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। परिसर में डिजिटल क्लासरूम, हॉस्टल, डाइनिंग हॉल, डिजिटल ऑपरेशंस सेंटर, ब्रीफिंग रूम, हैंगर और समर्पित एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस सुविधा उपलब्ध होगी। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक उड़ान प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

34 आधुनिक विमानों से मिलेगी ट्रेनिंग

पायलट प्रशिक्षण के लिए बेलोरा एयरपोर्ट पर कुल 34 आधुनिक विमान तैनात किए गए हैं। इनमें 31 सिंगल इंजन पाइपर आर्चर विमान और 3 ट्विन इंजन डायमंड DA42 NG विमान शामिल हैं।इन विमानों में आधुनिक गारमिन G1000 NXi कॉकपिट सिस्टम और ADS-B ट्रैकिंग तकनीक उपलब्ध है। इसके अलावा कैडेट्स को वास्तविक उड़ान से पहले अभ्यास कराने के लिए तीन फ्लाइट सिम्युलेटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

180 कैडेट्स से होगी शुरुआत

अकेडमी में एक महीने के भीतर व्यावहारिक उड़ान प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है। पहले बैच में 180 कैडेट्स को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक छह प्रशिक्षुओं पर एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर नियुक्त करने का अनुपात निर्धारित किया गया है।कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 18 महीने का होगा। प्रत्येक कैडेट को कुल 200 घंटे की वास्तविक उड़ान पूरी करनी होगी। इसमें 185 घंटे सिंगल इंजन और 15 घंटे मल्टी इंजन विमान पर उड़ान का प्रशिक्षण शामिल रहेगा।

साल में 300 दिन उड़ान प्रशिक्षण की संभावना

विशेषज्ञों के अनुसार, अमरावती का अनुकूल मौसम उड़ान प्रशिक्षण के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। यहां साल में कम से कम 300 दिन उड़ान प्रशिक्षण संचालित करने की संभावना जताई गई है। इससे कैडेट्स को नियमित रूप से व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सकेगा।

देश के विमानन क्षेत्र को मिलेगा प्रोत्साहन

अमरावती की फ्लाइंग अकेडमी के अलावा एयर इंडिया ने गुरुग्राम में भी लगभग छह लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैले एविएशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के विकास में निवेश किया है। इसे दक्षिण एशिया के बड़े विमानन प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल करने की योजना है।

देश में लगातार बढ़ती हवाई यात्रा और विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पायलटों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में अमरावती में एयर इंडिया की फ्लाइंग अकेडमी शुरू होना स्थानीय स्तर पर रोजगार, प्रशिक्षण और विमानन क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकता है। इससे अमरावती को राष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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