निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएगी सरकार, पहले दो बच्चों को मिलेगी आर्थिक सहायता

मुंबई- महाराष्ट्र सरकार ने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के परिवारों के लिए बड़ा राहत भरा फैसला लिया है। अब महाराष्ट्र भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के पहले दो बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।श्रम विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, संशोधित ‘शैक्षणिक सहायता योजना’ को लागू किया गया है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण श्रमिक परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना है।

सात योजनाओं को मिलाकर बनाई गई एकीकृत योजना

श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने बताया कि इससे पहले शिक्षा सहायता के लिए सात अलग-अलग योजनाएं संचालित की जा रही थीं। अब इन सभी योजनाओं को मिलाकर एक एकीकृत शैक्षणिक सहायता योजना शुरू की गई है। इससे लाभार्थियों को आवेदन प्रक्रिया में आसानी होगी और सहायता वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

शैक्षणिक स्तर के अनुसार मिलेगी सहायता

नई योजना के तहत विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा के स्तर के अनुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। योजना की पात्रता, सहायता राशि और अन्य आवश्यक नियम राज्य सरकार द्वारा तय किए गए हैं। इसका लाभ केवल पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के पहले दो बच्चों को ही मिलेगा।

उच्च शिक्षा में आर्थिक बाधाएं होंगी कम

सरकार का कहना है कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं कक्षा तक बच्चों को निशुल्क शिक्षा मिलती है, लेकिन इसके बाद दसवीं, बारहवीं और उच्च शिक्षा के दौरान कई श्रमिक परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए योजना में बदलाव किया गया है, ताकि पैसों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई अधूरी न छूटे।

श्रमिक परिवारों को मिलेगा सीधा फायदा

महाराष्ट्र भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के माध्यम से इस योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचने में आर्थिक मदद देना है।

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