शक्तिपीठ महामार्ग के लिए 13 जिलों में भूमि अधिग्रहण शुरू

मुंबई- महाराष्ट्र सरकार ने बहुप्रतीक्षित लेकिन किसानों के विरोध का सामना कर रहे पवनार से पत्रादेवी (नागपुर-गोवा) शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) राज्य के 13 जिलों के 409 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करेगा।इस परियोजना के लिए लगभग 8,709.89 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने इस संबंध में 9 जून 2026 को अधिसूचना जारी की है।

856 किलोमीटर लंबा होगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे

प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 856 किलोमीटर होगी। यह महामार्ग महाराष्ट्र के 13 जिलों से होकर गुजरेगा। सरकार ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र महामार्ग अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत सड़क के निर्माण, रखरखाव, प्रबंधन और संचालन के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।हालांकि राज्य के कई हिस्सों में किसानों द्वारा इस परियोजना का विरोध किया जा रहा है, फिर भी कुछ गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है और अब शेष क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

किन जिलों में होगा भूमि अधिग्रहण?

इस परियोजना से प्रभावित 13 जिले हैं:

  • वर्धा
  • यवतमाल
  • नांदेड़
  • हिंगोली
  • परभणी
  • बीड
  • लातूर
  • धाराशिव
  • सोलापुर
  • सातारा
  • सांगली
  • कोल्हापुर

इन जिलों के कुल 409 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। सबसे अधिक गांव कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर और हिंगोली जिलों में प्रभावित होंगे।

प्रमुख प्रभावित गांव

कुछ प्रमुख प्रभावित गांवों में शामिल हैं:

  • वर्धा: तिगांव, धोत्रा, चिकणी, देवळी, खर्डा आदि।
  • यवतमाल: हिवरा, बोरगांव, चिंचघाट, सोनेगांव, दत्तापुर आदि।
  • नांदेड़: पेवा, करोडी, धानोरा, बोरगांव, नेवरी आदि।
  • सोलापुर: वैराग, करकंब, मोडनिंब, वेळापूर, चांदापुरी आदि।
  • सातारा: म्हसवड, मायणी, खडकी, माळवाडी आदि।
  • सांगली: विटा, कुंडल, वाळवा, कामेरी, येलूर आदि।
  • कोल्हापुर: गारगोटी, आजरा, शिरोली, सोनाळी, कोरीवडे, बिजूर सहित अनेक गांव।

किसानों में नाराजगी

राज्यभर के किसान संगठनों ने इस परियोजना का विरोध किया है। उनका कहना है कि उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि यह एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों को जोड़कर औद्योगिक, धार्मिक और पर्यटन विकास को गति देगा।भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद अब प्रभावित किसानों और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत तथा मुआवजा प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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