सोनीपत में चल रही थी नकली सिक्कों की फैक्ट्री, 6 आरोपी गिरफ्तार; 6,400 सिक्के और छह मशीनें बरामद

पुलिस के अनुसार, गिरोह हरियाणा के सोनीपत में पिछले करीब 10 महीनों से पेचकस बनाने की आड़ में नकली सिक्कों की फैक्ट्री चला रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने छह भारी मशीनें, 6,400 नकली सिक्के और करीब 5 लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के बरामद किए। मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाए
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य के नकली सिक्के बाजार में पहुंचाए थे। गिरोह प्रतिदिन 10 से 12 हजार नकली सिक्के बनाने की क्षमता रखता था। एक सिक्का तैयार करने में करीब 5 से 6 रुपये खर्च होते थे।
बिचौलियों के जरिए बाजार में पहुंचाते थे सिक्के
गिरोह 100-100 सिक्कों के पैकेट बिचौलियों को सप्लाई करता था। 200 रुपये मूल्य के नकली सिक्के कथित तौर पर 160 रुपये में दिए जाते थे। इसके बाद युवाओं के माध्यम से टोल प्लाजा, शराब की दुकानों, छोटे कस्बों और ग्रामीण बाजारों में सिक्के खपाए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, कई युवाओं को भी सिक्कों के नकली होने की जानकारी नहीं होती थी।
जेल में तैयार हुई थी गिरोह की योजना
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पहले सुनार का काम करता था। इसी दौरान उसने सिक्कों की नकल बनाने का हुनर सीखा। तिहाड़ जेल में उसकी मुलाकात हिमांशु से हुई, जिसके बाद दोनों ने मिलकर नकली सिक्कों का नेटवर्क खड़ा किया। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई से बचने के लिए गिरोह अलग-अलग स्थानों पर फैक्ट्रियां स्थापित करता और अपने ठिकाने बदलता रहता था।
मधुबनी में छापेमारी, एक और आरोपी गिरफ्तार
सहारनपुर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए बिहार के मधुबनी में छापेमारी की और आरोपी मिथिलेश चौरसिया को गिरफ्तार किया। इससे पहले पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है।
पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं नकली सिक्कों की फैक्ट्रियां
दिल्ली और हरियाणा में वर्ष 2016 और 2019 में भी नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्रियों का पर्दाफाश हुआ था। उन मामलों में बड़ी संख्या में नकली सिक्के और उन्हें बनाने वाली मशीनें बरामद की गई थीं।
सावधान रहें: 20 रुपये का सिक्का लेते समय उसकी बनावट और आधिकारिक विशेषताओं पर ध्यान दें। किसी सिक्के पर संदेह होने पर बैंक या संबंधित अधिकारियों से उसकी जांच करवाएं।



