सेबी ने लिस्टेड कंपनियों को रियल टाइम स्टॉक प्राइस बताने का दिया निर्देश

मुंबई- सेबी ने लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के रियल टाइम प्राइस को विभिन्न मंचों सहित तीसरे पक्ष के साथ साझा करने के लिए शुक्रवार को मानदंड जारी किए। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कुछ ऑनलाइन गेमिंग मंच, ऐप, वेबसाइट पर वर्चुअल लेनदेन सेवाएं या फंतासी गेम के बारे में यह पाया था कि ये लिस्टेड कंपनियों के वास्तविक समय के शेयर मूल्यों के उतार-चढ़ाव पर आधारित हैं। सेबी ने कहा कि कुछ मंचों पर असल में वर्चुअल शेयर पोर्टफोलियो के प्रदर्शन के आधार पर मौद्रिक प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। इसी आकलन के आधार पर सेबी ने मानदंड जारी किए हैं।

डेटा का दुरुपयोग रोकने की तैयारी 

सेबी ने एक सर्कुलर में कहा कि रियल टाइम प्राइस के दुरुपयोग या अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए कुछ खास नियम लागू होते हैं। बाजार नियामक के मुताबिक, शेयर बाजारों और पंजीकृत बाजार मध्यस्थों सहित बाजार ढांचागत संस्थानों (एमआईआई) को यह सुनिश्चित करना होगा कि वास्तविक समय मूल्य डेटा किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं किया जाए, जब तक कि प्रतिभूति बाजार के उचित कामकाज या नियामक अनुपालन के लिए यह जरूरी न हो।

एमआईआई या मध्यस्थों को उस कंपनी के साथ समझौता करना होगा जिसके साथ वे वास्तविक समय मूल्य डेटा साझा करते हैं। इन समझौतों में डेटा का उपयोग करने की गतिविधियों और कारणों को निर्दिष्ट किया जाना चाहिए। संस्थाओं और गतिविधियों की सूची की समीक्षा साल में कम से कम एक बार की जानी चाहिए।

30 दिन बाद प्रभावी होंगे

हालांकि बाजार मूल्य आंकड़ों को निवेशक शिक्षा एवं जागरूकता के लिए किसी मौद्रिक प्रोत्साहन के बगैर भी साझा किया जा सकता है, लेकिन इसमें एक दिन की देरी होनी चाहिए। एमआईआई और बिचौलियों को उन संस्थाओं द्वारा मूल्य डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाना चाहिए जिनके साथ वे इसे साझा करते हैं। सेबी ने कहा कि ये नियम इस परिपत्र के जारी होने के 30 दिन बाद प्रभावी होंगे।

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