जालना-खामगांव रेल परियोजना को केंद्र की हरी झंडी

भूमि अधिग्रहण आदेश जारी, मराठवाड़ा और विदर्भ के विकास को मिलेगी नई दिशा

नई दिल्ली: लंबे इंतजार के बाद जालना और खामगांव को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना अब साकार होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।इस रेल मार्ग के शुरू होने से न केवल यात्री सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि उत्तर भारत से सीधा रेल संपर्क स्थापित होने के कारण यह परियोजना क्षेत्र के व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

1906 में हुई थी पहली मंजूरी

इस परियोजना का इतिहास 115 वर्ष पुराना है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 30 जून 1906 को ब्रिटिश शासन और निजाम सरकार ने इस रेल मार्ग को मंजूरी दी थी, जिसके लिए उस समय लगभग 32 लाख 65 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे।वर्ष 1932-34 के दौरान भूमि अधिग्रहण और प्रारंभिक कार्य भी शुरू हुआ था, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण यह परियोजना रोक दी गई। स्वतंत्रता के बाद भी कई दशकों तक यह योजना ठप पड़ी रही।

लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पुनर्जीवित करने में रेलवे संघर्ष समिति की दो दशक लंबी लड़ाई महत्वपूर्ण रही। स्वर्गीय गणेश चौधरी के नेतृत्व में समिति ने लगातार आंदोलन और जनजागरण के माध्यम से इस मांग को जीवित रखा।

राजनीतिक प्रयासों से मिली गति

परियोजना को आगे बढ़ाने में पूर्व रेल राज्य मंत्री रावसाहेब पाटील दानवे के प्रयासों से वर्ष 2011 में पुनः सर्वेक्षण कराया गया। इसके बाद राज्य सरकार ने 15 मार्च 2024 को परियोजना में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी स्वीकार करते हुए लगभग 2453.85 करोड़ रुपये मंजूर किए।चिखली विधायक श्वेता महाले और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव की पहल तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई बैठकों ने इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

विकास का नया केंद्र बन सकता है जालना

भौगोलिक दृष्टि से मध्य भारत में स्थित जालना इस रेल मार्ग के जुड़ने के बाद एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन के रूप में विकसित हो सकता है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

आगे की योजना

रेलवे संघर्ष समिति ने इस सफलता के बाद अब जालना–बीड़ रेल संपर्क के लिए नए अभियान की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना मराठवाड़ा और विदर्भ के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में ऐतिहासिक परिवर्तन ला सकती है। 115 साल पुराना सपना अब वास्तविकता के करीब पहुंच गया है, और यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय विकास की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है

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