मुंबई- जमीन या मकान की खरीद-बिक्री करने वालों के लिए अहम खबर सामने आई है। बढ़ती प्रॉपर्टी धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए अब जमीन और संपत्ति की दस्तावेज रजिस्ट्री के समय आधार कार्ड ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है। यह प्रस्ताव मुद्रांक शुल्क विभाग की ओर से पेश किया गया है।जमीन और मकानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी दूसरे की संपत्ति पर अपना अधिकार बताने और असली मालिक की गैरमौजूदगी में संपत्ति की रजिस्ट्री कराने जैसे धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहे हैं। इन्हीं मामलों पर अंकुश लगाने के लिए आधार ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है।
आधार ऑथेंटिकेशन से क्या होगा?
प्रस्ताव लागू होने के बाद दस्तावेज रजिस्ट्री के दौरान जमीन या मकान बेचने वाले और खरीदने वाले व्यक्ति की पहचान आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए सत्यापित की जा सकेगी। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है, जिसकी पहचान दस्तावेजों में दर्ज है।इस व्यवस्था से फर्जी पहचान, नकली दस्तावेज और गलत व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री जैसी धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल वैकल्पिक दस्तावेजों से होती है प्रक्रिया
वर्तमान में दस्त रजिस्ट्री के दौरान आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, आधार ऑथेंटिकेशन नहीं हो पाने की स्थिति में कुछ वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने की सुविधा उपलब्ध है। इनमें ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, मनरेगा जॉब कार्ड, फोटोयुक्त बैंक या पोस्ट ऑफिस पासबुक, पेंशन संबंधी दस्तावेज और अन्य पहचान पत्र शामिल हैं।
कई बार सर्वर की समस्या या आधार पर बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्पष्ट नहीं आने के कारण वैकल्पिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी प्रक्रिया के संभावित दुरुपयोग को देखते हुए आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करने का प्रस्ताव सामने आया है।अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो जमीन और मकान की दस्त रजिस्ट्री प्रक्रिया में पहचान की पुष्टि और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।




