देश में कोरोना की पहली नेजल वैक्सीन को मिली मंजूरी,18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को दी जाएगी, इसकी 4 ड्रॉप्स होंगी कारगर

दिल्ली-  भारत को कोरोना के खिलाफ पहली इंट्रानेजल वैक्सीन मिल गई है। इसे हैदराबाद की फार्मा कंपनी भारत बायोटेक ने बनाया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने मंगलवार को इसे इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी भी दे दी। वैक्सीन की खुराक 18 साल से ज्यादा के लोगों को दी जाएगी। इसके आखिरी फेज के ट्रायल पिछले महीने ही पूरे हुए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट कर नेजल वैक्सीन को बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा- वैक्सीन कोरोना महामारी से लड़ाई की ओर एक बड़ा कदम है। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साइंस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और ह्यूमन रिसोर्स को बढ़ावा दिया है। साइंस पर आधारित अप्रोच और सबके प्रयास से हम कोरोना को जरूर हराएंगे।

इंट्रानेजल वैक्सीन की खासियत

रत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन का नाम BBV154 है। इसे नाक के जरिए शरीर में पहुंचाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि शरीर में जाते ही यह कोरोना के इन्फेक्शन और ट्रांसमिशन दोनों को ब्लॉक करती है। चूंकि इस वैक्सीन में किसी इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए इससे चोट लगने का कोई खतरा नहीं है। साथ ही हेल्थकेयर वर्कर्स को भी कोई खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बूस्टर डोज की तरह दी जाएगी वैक्सीन

इंट्रानेजल वैक्सीन को प्राइमरी वैक्सीन के तौर पर दिया जाएगा। हालांकि, इसे कोवैक्सिन और कोविशील्ड जैसी वैक्सीन्स लेने वालों को बूस्टर डोज के तौर पर भी दिया जा सकता है। भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन डॉ. ​​​​​कृष्णा एल्ला ने रिपब्लिक टीवी को बताया कि पोलियो की तरह इस वैक्सीन की भी 4 ड्रॉप्स काफी हैं। दोनों नॉस्ट्रिल्स में दो-दो ड्रॉप्स डाली जाती हैं।

अब तक 213.72 करोड़ वैक्सीन डोज लगीं

स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार, अब तक वैक्सीनेशन ड्राइव की शुरुआत से अब तक 213.72 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी हैं। वहीं, 17 करोड़ से ज्यादा लोगों को बूस्टर डोज दी जा चुकी है। 12 से 14 साल की उम्र के 4.04 करोड़ बच्चों को भी वैक्सीन दी जा चुकी है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एलिजिबल लोगों में से केवल 12% लोगों ने ही बूस्टर डोज ली है। फ्रंटलाइन वर्कर्स, हेल्थकेयर वर्कर्स और 60 साल या उससे ज्यादा के 16.8 करोड़ लोग प्रिकॉशनरी डोज के लिए एलिजिबल हैं। इनमें से सिर्फ 35% को ही वैक्सीन की यह डोज लगी है।

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