
इस पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की जा रही है। बताया जा रहा है कि पिछले छह महीनों से पतसंस्था ने निवेशकों और जमाकर्ताओं को उनकी जमा राशि लौटाना बंद कर दिया था, जिससे हजारों निवेशकों में भारी नाराजगी फैल गई थी।सूत्रों के अनुसार, संस्था में करीब 25 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि है। इस पतसंस्था में शहर के नौकरीपेशा लोग, पेंशनधारक, मजदूर तथा घरेलू कामकाजी महिलाओं सहित लगभग ढाई हजार जमाकर्ताओं का पैसा फंसा हुआ है।
निवेशकों ने आरोप लगाया था कि संस्था के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गबन की गई राशि को अन्य स्थानों पर निवेश किया। लगातार शिकायतों और बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार आर्थिक अपराध शाखा ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और गबन की राशि के उपयोग तथा अन्य संभावित पहलुओं की जांच जारी है।



