अकोला में नहीं उगा सोयाबीन, सैकड़ो किसानों ने दर्ज कराई शिकायत

विधायक हरीश पिंपले के विधानसभा में मुद्दा उठाने के बाद हरकत में आया कृषि विभाग


अकोला -महाराष्ट्र के अकोला जिले में खरीफ सीजन के दौरान बोए गए सोयाबीन की अंकुरण विफल होने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। जिले के हजारों एकड़ क्षेत्र में बोया गया सोयाबीन समय पर नहीं उगने से किसानों के सामने दोबारा बुवाई का संकट खड़ा हो गया है। कई स्थानों पर तुअर और कपास के बीजों के भी अंकुरित नहीं होने की शिकायतें सामने आई हैं। अब तक जिले भर से 197 किसानों ने कृषि विभाग के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है, जबकि कई किसान अभी भी शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं।

इस वर्ष मानसून की देरी के कारण किसानों ने बारिश का इंतजार करने के बाद बड़ी उम्मीदों के साथ सोयाबीन, तुअर और कपास की बुवाई की थी। किसानों ने बीज, खाद, जुताई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर हजारों रुपये खर्च किए, लेकिन बुवाई के 10 से 15 दिन बाद भी अनेक खेतों में बीजों का अंकुरण नहीं हुआ। कई गांवों में खेत पूरी तरह खाली नजर आ रहे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

उगवण नहीं होने से किसानों को अब दोबारा बीज खरीदकर बुवाई करनी पड़ रही है। इससे उनकी लागत लगभग दोगुनी हो गई है। पहले से ही आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहे किसानों के लिए यह स्थिति किसी बड़े झटके से कम नहीं है। किसानों का आरोप है कि बाजार में उपलब्ध कुछ कंपनियों के बीजों की गुणवत्ता खराब होने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने दोषी बीज कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और नुकसान की भरपाई की मांग की है।

भाजपा विधायक हरीश पिंपले ने महाराष्ट्र विधानसभा में उठाया मुद्दा

इस पूरे मामले को भाजपा विधायक हरीश पिंपले ने महाराष्ट्र विधानसभा में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार का ध्यान अकोला सहित विदर्भ के किसानों की समस्या की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि खराब बीजों के कारण किसानों की पूरी फसल खतरे में पड़ गई है और उन्हें दोबारा बुवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। विधायक पिंपले ने दोषी कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, किसानों को मुआवजा तथा दोबारा बुवाई के लिए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।

विधानसभा में मामला गूंजने के बाद राज्य के कृषि राज्यमंत्री दत्तात्रय भरणे ने कृषि विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद कृषि विभाग हरकत में आया है। अब जिले के सभी तहसीलों में प्रभावित किसानों की जानकारी एकत्रित की जा रही है। अधिकारियों द्वारा खेतों का निरीक्षण, पंचनामा और किसानों की शिकायतों का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही संबंधित बीजों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं, ताकि अंकुरण विफल होने के कारणों का पता लगाया जा सके और दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

अब तक दर्ज हुई 197 शिकायते

कृषि विभाग के अनुसार अब तक दर्ज हुई 197 शिकायतों में सबसे अधिक 61 शिकायतें रवि सीड्स (मध्यप्रदेश) के खिलाफ प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा बूस्टर सीड्स के खिलाफ 28, विकर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ 19, ऑस्कर सीड्स के खिलाफ 15, इनोवेज के खिलाफ 12 तथा महाबीज के खिलाफ 8 शिकायतें दर्ज की गई हैं। अन्य कंपनियों के विरुद्ध भी अलग-अलग संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच जारी है।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें राहत नहीं मिली तो उनकी पूरी खरीफ फसल प्रभावित हो जाएगी। उन्होंने सरकार से दोषी कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, बीजों की गुणवत्ता की सख्त निगरानी, दोबारा बुवाई के लिए आर्थिक सहायता तथा हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।

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