
नयी दिल्ली- राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में जब शहीद सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जा रहा था, तब गर्व और गम का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने वहां मौजूद सभी की आंखें नम कर दी। बेटे की वीरता पर गर्व से भरी मां जैसे ही सम्मान ग्रहण करने पहुंचीं, तो अपने कलेजे के टुकड़े को याद कर उनके आंसू दर्द बनकर छलक पड़े। इस भावुक पल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे बढ़कर प्रोटोकॉल की सीमाएं तोड़ते हुए शहीद की मां को गले लगा लिया।
सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (प्रथम चरण) में अकोला जिले के मोरगांव भाकरे गांव के जंजल प्रवीण प्रभाकर भारतीय सेना के सिपाही को दो आतंकवादियों को मार गिराने के लिए कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। उनकी असाधारण बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया। पुरस्कार शहीद की पत्नी शंभाला प्रवीण जंजाल और उनकी मां शालू प्रभाकर जंजाल ने ग्रहण किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस अवसर पर उपस्थित थे।
राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़ लगाया गले
राष्ट्रपति भवन में सम्मान ग्रहण करते समय शहीद की मां भावुक होकर रो पड़ीं। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें गले लगाया ढांढस बंधाया। यह मार्मिक क्षण देशभर के लोगों के दिलों को छू गया। सांत्वना देने के बाद राष्ट्रपति ने शहीद प्रवीण की मां और पत्नी को बेटे की बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र प्रदान किया।
सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर ने 6 जुलाई 2024 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में एक भीषण आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया था। ऑपरेशन के दौरान उन्होंने दो आतंकवादियों को मार गिराया, लेकिन मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।



