
कार्रवाई के बाद भी जारी कारोबार
मई 2025 में महाराष्ट्र कृषि विभाग ने कंपनी के कई कीटनाशक उत्पादों पर रोक लगाई थी। यह कार्रवाई टेक्नो लीगल सेल, फरीदाबाद तथा गुजरात कृषि विभाग की शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। इसके बावजूद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि: प्रतिबंधित उत्पाद बाजार में बिकते रहे महाराष्ट्र सहित देश के लगभग 16 राज्यों में व्यापार जारी रहा कंपनी के नाम से लगातार इनवॉइस भी जारी होते रहे
अकोला में भी सैंपल फेल, कोर्ट में मामला
अकोला जिले में इस कंपनी के कीटनाशकों के नमूने फेल पाए गए हैं। इस प्रकरण में न्यायालय में मामला लंबित है, जो इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। किसानों के साथ बड़ा अन्याय सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि: खराब गुणवत्ता के कारण किसानों को नुकसान हुआ प्रभावित किसानों की स्थिति पर कोई ठोस जांच या राहत कार्य नहीं
नाम बदलकर कारोबार का आरोप
सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने कार्रवाई के बाद अपनी ही एक नई फर्म MBF के नाम से अन्य राज्यों में GST रजिस्ट्रेशन कर व्यापार शुरू किया।बताया जा रहा है कि वह कंपनी मूल रूप से किसी अन्य कार्य (फर्नीचर व्यवसाय) के लिए पंजीकृत की गई थी, उसी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर कीटनाशक कारोबार आगे बढ़ाया गया जबकि वैध अनुमति और लाइसेंस पर गंभीर प्रश्न खड़े हैं
- एक PAN पर कार्रवाई → दूसरा PAN/फर्म एक्टिव
- पुराने GST नंबर बंद → नए GST नंबर चालू
- फर्जी या “डायवर्टेड” बिजनेस मॉडल
सैकड़ों करोड़ का टर्नओवर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि: प्रतिबंध के बाद भी कंपनी का कारोबार रुका नही सैकड़ों करोड़ रुपये का टर्नओवर होने की जानकारी सूत्रों से मिल रही है
अब सरकार की साख दांव पर क्या इन पर लगेंगा मकोका
इस मामले ने शासन-प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब नजरें केंद्र सरकार के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और महाराष्ट्र सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
– बड़ा सवाल अन्य 12 राज्य कब करेंगे कार्यवाही ?
जब एक कंपनी पर प्रतिबंध लगाया गया, तो फिर उसका उत्पाद बाजार में कैसे बिकता रहा? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण का मामला?
यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे कृषि तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते सख्त और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका खामियाजा सीधे देश के किसानों को भुगतना पड़ेगा।



