नयी दिल्ली- केंद्र सरकार पुरानी गाड़ियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करना आसान बनाने जा रही है। इसके लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की अनिवार्यता खत्म किए जाने की तैयारी है इसके लिए नीति आयोग की एक हाई-लेवल कमेटी ने परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा, सरकार 15 साल पुरानी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नियम में भी बदलाव कर सकती है।
क्या बदलाव हो सकते हैं?
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NOC की जगह डिजिटल क्लियरेंस सिस्टम
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नीति आयोग की हाई-लेवल कमेटी ने परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को प्रस्ताव भेजा है।
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अब ऑटो-जेनरेटेड क्लियरेंस सिस्टम लागू होगा।
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वाहनों का डेटा VAHAN के सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डेटाबेस में होगा।
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किसी भी राज्य का RTO दूसरे राज्य के वाहन का रिकॉर्ड ऑनलाइन वेरिफाई कर सकेगा।
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टैक्स, पेंडिंग चालान या बकाया की जानकारी ऑटोमैटिक वेरिफाई होगी।
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वाहन मालिक को पुराने RTO के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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15 साल पुरानी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नियम में बदलाव
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अब गाड़ियों की उम्र से फर्क नहीं पड़ेगा।
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गाड़ी सड़क पर रहेगी या नहीं, इसका निर्णय फिटनेस टेस्ट के आधार पर होगा।
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अंतरराष्ट्रीय प्रैक्टिस के अनुसार, गाड़ी कितनी पुरानी है इससे फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते फिटनेस टेस्ट पास हो।
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कमर्शियल वाहनों को फायदा
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उम्र आधारित पाबंदियों के कारण कई बार अच्छी स्थिति वाली गाड़ियां भी कबाड़ घोषित कर दी जाती थीं।
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सख्त फिटनेस निरीक्षण प्रणाली लागू होने पर सेफ और फिट कमर्शियल वाहन उम्र की सीमा पार करने के बाद भी चल सकते हैं।
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अभी की स्थिति (Motor Vehicle Act, 1988 के अनुसार)
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कोई भी राज्य बदलने पर वाहन एक साल तक दूसरे राज्य में चल सकता है।
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एक साल के भीतर नए राज्य में वाहन को रजिस्टर्ड करना जरूरी।
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इसके लिए पुराने RTO से NOC लेना आवश्यक था।
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NOC के लिए दस्तावेज़: रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट, टैक्स रसीद आदि।
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यह सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि वाहन पर कोई बकाया या आपराधिक मामला नहीं है।
इस बदलाव से पुराने वाहनों का ट्रांसफर और रजिस्ट्रेशन तेज़, आसान और डिजिटल हो जाएगा, जिससे यात्रियों और वाहन मालिकों की परेशानियां कम होंगी।




