अब 23 वर्ष की उम्र तक रहा जा सकेगा अनाथालय में, अनाथ बच्चों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय. 

अकोला- अब तक के नियमानुसार अनाथालय में रहनेवाले बच्चों की आयु 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद उन्हें अनाथालय छोडना पडता था. किंतु इस आयु तक बच्चे पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं हो पाते थे. इस बात को ध्यान में रखकर अब अनाथ लडके-लडकियों को 23 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक अनाथाश्रम में रहने की अनुमति रहेगी. इस आशय का निर्णय राज्य के महिला व बालकल्याण विभाग द्वारा लिया गया है. समूचे देश में यह क्रांतिकारी निर्णय लेनेवाला महाराष्ट्र पहला राज्य है और इस निर्णय को अनाथ व निराधार बच्चों सहित अनाथाश्रम संचालकों के लिए बेहद राहतपूर्ण माना जा रहा है.
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए राज्य की महिला व बालविकास मंत्री एड. यशोमति ठाकुर ने बताया कि, अब तक प्रचलित नियमों के चलते अनाथाश्रम में रहनेवाले अनाथ बच्चों को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के साथ ही अनाथालय छोड़ देना पडता था. इस आयु तक बच्चे बड़े मुश्किल से कक्षा 12 वीं तक की शिक्षा प्राप्त कर पाते है और पूरी तरह से आत्मनिर्भर भी नहीं हो पाते. ऐसे में अनाथालय से बाहर निकलने पर उन्हें कई तरह की समस्याओं और दिक्कतों का सामना करना पडता है. इस बात के मद्देनजर उनके विभाग ने अनाथाश्रम में रहने हेतु आयु मर्यादा को बढाने का निर्णय लिया और अब अनाथ बच्चे 23 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक अनाथाश्रम में रह सकेंगे. इस आयु तक वे स्नातक स्तर की पदवी प्राप्त करने के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़े हो सकते है. जिसके बाद उन्हें किसी भी तरह की समस्या अथवा दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

• राज्य में कहां कितने अनाथालय

नंदूरबार – 93, हिंगोली – 18, जालना – 16,गोंदिया – 12, ठाणे – 11

कोरोना काल में 195 बच्चे हुए अनाथ

सर्वाधिक संख्या नंदूरबार में – यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि राज्य में मौजूदा कोविड संक्रमण काल के दौरान करीब 195 बच्चों के माता-पिता की मौत हुई है और वे अनाथ हो गये है. इन बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी राज्य के महिला व बालविकास विभाग द्वारा उठायी जायेगी. ऐसे बच्चों में सर्वाधिक संख्या नंदूरबार जिले से सामने आयी है. जहां पर 93 बच्चे कोविड संक्रमण के चलते अनाथ हुए है. इन सभी 195 बच्चों में से 42 बच्चों की जिम्मेदारी सरकार द्वारा पहले ही ली जा चुकी है.

महिला व बालविकास मंत्री यशोमति ठाकुर के अनुसार  कोविड संक्रमण के चलते अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों का शोषण होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता. ऐसे में उनके संरक्षण एवं पालन-पोषण के लिए टास्कफोर्स गठित करने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है और कुछ दिन पूर्व ही सभी जिलों के जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिलास्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है. साथ ही मनपा क्षेत्र के सभी अस्पतालों के दर्शनी हिस्से में चाईल्ड हेल्पलाईन क्रमांक 1098 का फलक लगाया गया है व कोविड के इलाज हेतु भरती होनेवाले मरीजों से उनके बच्चों की जानकारी दर्ज करने के साथ ही किसी विपरित स्थिति में बच्चों की जिम्मेदारी किसे दी जाये, इसकी जानकारी भी लिखित तौर पर दर्ज करवायी जा रही है. साथ ही कोविड संक्रमण के चलते अनाथ होनेवाले बच्चों के रहने की व्यवस्था सरकाद्वारा की जा रही है।

अनाथ हुए बच्चों की जिलानिहाय संख्या

  • नंदूरबार – 93
  • हिंगोली 18
  • जालना 16
  • गोंदिया – 12
  • ठाणे – 11
  • अहमदनगर – 8
  •  परभणी -4
  • नागपुर -7
  • पुणे – 4
  • धुले – 3
  • बुलडाणा – 3
  • पालघर – 2
  • रत्नागिरी – 2
  • सिंधुदूर्ग – 2
  • वाशिम – 2
  • isha

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