मुंबई – दैनिक दिव्य हिन्दी बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों के अधिकारों को मजबूत करते हुए एक अहम फैसले में कहा है कि बेसमेंट और पार्किंग एरिया आम सुविधाएं हैं और इन्हें अलग यूनिट के तौर पर बेचा नहीं जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे एरिया का मालिकाना हक, भले ही रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए लिया गया हो, महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत सोसायटी की मेंबरशिप का अधिकार नहीं देता।
न्यायमूर्ति अमित बोरकर की पीठ ने नवी मुंबई निवासी अमानुल एकरामुल की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला नवी मुंबई के तलोजा स्थित सिडको की लीज पर दी गई जमीन पर बने एक रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट से जुड़ा था।
क्या था मामला
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जनवरी 2016 में प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिला
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2019 में कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी बनी
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इसके बाद बिल्डर ने पूरे बेसमेंट और पार्किंग एरिया को अपने करीबी रिश्तेदार को रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए ट्रांसफर कर दिया
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इसी आधार पर खरीदार ने सोसायटी में मेंबरशिप की मांग की
अदालत की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि:
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सोसायटी की मेंबरशिप केवल स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के अनुसार मान्यता प्राप्त फ्लैट से ही मिलती है
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बेसमेंट और पार्किंग ‘फ्लैट’ की कानूनी परिभाषा में नहीं आते
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आम सुविधाओं को निजी समझौते या सेल डीड के जरिए अलग यूनिट में नहीं बदला जा सकता
पीठ ने आर्किटेक्ट के सर्टिफिकेट और स्वीकृत लेआउट पर भरोसा करते हुए कहा कि बेसमेंट और पार्किंग एफएसआई से बाहर हैं और इन्हें स्पष्ट रूप से कॉमन एरिया के रूप में दर्शाया गया है।
डेवलपर्स और खरीदारों के लिए सख्त संदेश
सोसायटी की ओर से वकील श्रीप्रसाद परब ने दलील दी कि पार्किंग और बेसमेंट बेचने योग्य यूनिट नहीं हैं, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
कोर्ट ने कहा कि: “मान्य मेंबरशिप की अवधारणा कानूनी पात्रता को ओवरराइड नहीं कर सकती।”
यह फैसला उन सभी मामलों में नज़ीर बनेगा, जहां सोसायटी बनने के बाद कॉमन सुविधाओं की बिक्री कर विवाद, आवश्यक सेवाओं में बाधा और संरचनात्मक खतरे पैदा किए जाते हैं।




