मुंबई/ पुणे / अकोला : घर खरीद-बिक्री के लेनदेन में बिल्डरों द्वारा होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए अब महारेरा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नोंदणी विभाग अपनी संपत्ति पंजीकरण की वेबसाइट को ‘महारेरा पोर्टल’ से जोड़ेगा।
इससे धोखाधड़ी वाले लेनदेन पर नियंत्रण होगा। इस विषय पर प्रस्ताव अगले सप्ताह सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ होने वाली बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा, ऐसी जानकारी महारेरा के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिडिया प्रतिनिधि से बातचीत में दी।
जमीन के लेनदेन अथवा घर की खरीद-बिक्री करते समय, दोनों वेबसाइट्स आपस में जुड़ने से लेन-देन पूरा करने से पहले उप-पंजीयक अधिकारी रियल टाइम में संबंधित प्रोजेक्ट का पंजीकरण नंबर जांच सकेंगे। इससे घर खरीदते समय होने वाली फसवणूक टल जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में बिल्डरों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी की घटनाएं बढ़ी थीं।
इसी कारण यह ग्राहक हित का निर्णय सरकार ने लिया है। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मंजूरी मिल गई है। परामर्श के बाद इसे लागू किया जाएगा। इसके बाद प्रोजेक्ट की अनुमति व स्वामित्व स्थिति जांची जा सकेगी और पंजीकरण के बिना किसी भी प्रोजेक्ट की संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।
बिल्डर संघटनाओं ने भी मौजूदा व्यवस्था की कमियों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। वर्तमान प्रणाली में एक ही संपत्ति का पंजीकरण कई खरीदारों के नाम पर हो जाता है। ऐसे फर्जी सौदों से खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और सालों तक मुकदमे झेलने पड़ते हैं।
प्रक्रिया के पहले चरण में जानकारी साझा करने व जांच के लिए मॉड्यूल शुरू होगा। आगे चलकर स्वामित्व अधिकार और प्रोजेक्ट की अनुमतियों का रियल टाइम वेरिफिकेशन शुरू होगा।
यह कदम लेन-देन को पारदर्शी और व्यवस्थित करने के लिए बेहद आवश्यक है। इससे खरीदार सक्षम होंगे और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। साथ ही अपंजीकृत प्रोजेक्ट में फ्लैट बिक्री पर रोक लगेगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वन स्टेट, वन रजिस्ट्रेशन नीति के अनुरूप है। साथ ही यह योजना केंद्र सरकार के पंजीकरण विधेयक 2025 से भी मेल खाती है।
क्या बदल जाएगा?
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बिल्डर आएंगे नियमों के दायरे में
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मनमाने लेन-देन पर लगेगी लगाम
दोनों पोर्टल्स के समन्वय से अवैध पंजीकरण स्रोतों पर ही नियंत्रण किया जा सकेगा और जिम्मेदारी तय होगी। इस कारण होने वाले फर्जी सौदे निश्चित रूप से रुकेंगे। अनधिकृत प्लॉटिंग के सौदे भी रुकेंगे और पारदर्शिता आएगी। महारेरा ने पहले ही कड़े नियम बनाए हैं, जिससे धोखाधड़ी पर लगाम लगी है। अब दोनों पोर्टल्स को जोड़ने से सीधी संपत्ति फसवणूक की कोई संभावना नहीं रहेगी।
दोनों पोर्टल्स को आपस में जोड़ने से नकली सौदों पर पूरी तरह विराम लगेगा। अब तक बिल्डरों द्वारा की जा रही अवैध प्लॉटिंग और फर्जी रजिस्ट्रेशन जैसी गड़बड़ियां थम जाएंगी। इससे सम्पूर्ण रियल एस्टेट व्यवहार में पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदारों का भरोसा भी मजबूत होगा। वास्तव में, महारेरा ने पहले ही कई कड़े नियम लागू किए हैं, जिससे धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आई है। अब यह कदम ग्राहकों की सुरक्षा को और अधिक सुनिश्चित करेगा तथा बिल्डरों पर भी जिम्मेदारी निश्चित करेगा। – सुनील इन्नाणी, संस्थापक अध्यक्ष, NAREDCO Akola
“महारेरा और नोंदणी विभाग के पोर्टल्स को जोड़ते है तो घर खरीदारों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। जिससे सभी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर और वैधता तुरंत जांची जा सकेगी। इससे खरीदारों को न केवल पारदर्शी व्यवहार मिलेगा, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले कानूनी विवादों से भी राहत मिलेगी। सरकार का यह कदम रियल एस्टेट क्षेत्र को साफ-सुथरा और भरोसेमंद बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है ।”
– हिरेन केसरिया, ओमकारा डेवलपर्स, मुंबई/पुणे
“ग्राहक वर्ग सहित सभी लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। पोर्टल्स के समन्वय से निवेश सुरक्षित होने का भरोसा मिलेगा। अब खरीदारों को जटिल स्वामित्व विवरणों में खुद रास्ता नहीं खोजना पड़ेगा। यह निर्णय खरीदार की धोखाधड़ी रोकेगा और उसे और अधिक जागरूक बनाएगा।”
– सौ अर्चना प्रदीप मुदिराज, निवेशक