दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में सीधे जमा होगी राशि; 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान वाले पात्र किसानों को मिलेगा लाभ
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ हंगाम 2026 में सूखे की मार झेल रहे किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के 304 सूखाग्रस्त तहसीलों के पात्र किसानों को फसल नुकसान के लिए प्रति किसान ₹5,000 की अग्रिम सहायता देने को मंजूरी प्रदान की गई है। इस संबंध में आपदा प्रबंधन, सहायता एवं पुनर्वास विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को शासनादेश जारी किया है।
शासनादेश के अनुसार, राज्य में लगभग 1.5 करोड़ सूखाग्रस्त किसानों को सहायता देने के लिए कुल ₹7,500 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। मुख्यमंत्री की घोषणा और 27 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल बैठक की मंजूरी के बाद यह निर्णय लिया गया है। सरकार का उद्देश्य दिवाली से पहले आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों को तत्काल राहत पहुंचाना है।
33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान पर मिलेगी सहायता
सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार, सूखाग्रस्त तहसीलों में जिन किसानों की फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, ऐसे सभी पात्र किसानों को ₹5,000 की अग्रिम सहायता दी जाएगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 1 नवंबर 2025 से 27 अक्टूबर 2026 तक विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत ई-केवाईसी पूरी कर चुके किसानों को दोबारा ई-केवाईसी कराने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन वन पट्टाधारक किसानों को अभी तक एग्रीस्टैक किसान पहचान क्रमांक नहीं मिला है, उन्हें ई-केवाईसी के आधार पर अग्रिम सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
इन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ
शासनादेश के अनुसार, वर्तमान एवं पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य तथा महानगरपालिका, नगरपालिका और नगर पंचायत के सदस्य इस सहायता के लिए पात्र नहीं होंगे। केंद्र एवं राज्य सरकार के ऐसे अधिकारी-कर्मचारी जिनका संयुक्त मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक है, इसी वेतन सीमा से अधिक वेतन पाने वाले संबंधित सार्वजनिक उपक्रमों एवं अनुदानित संस्थाओं के कर्मचारी भी अपात्र होंगे।
गैर-कृषि आय के स्रोतों से आयकर भरने वाले व्यक्ति तथा ₹25,000 से अधिक मासिक पेंशन पाने वाले पेंशनधारक भी सहायता के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, पूर्व सैनिकों को इस पेंशन संबंधी अपात्रता से छूट दी गई है। सहकारी संस्थाओं के निर्धारित वेतन सीमा से अधिक वेतन पाने वाले पदाधिकारी एवं कर्मचारी भी अपात्र होंगे, जबकि सहकारी चीनी कारखानों के मौसमी कामगारों को इस सहायता से बाहर नहीं रखा गया है।
बैंकों को भी दिए जाएंगे निर्देश
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक आपदा के तहत किसानों को मिलने वाली सहायता राशि को बैंक उनके ऋण खाते में समायोजित न करें और न ही अन्य किसी प्रकार की वसूली के लिए इस राशि को इस्तेमाल करें। इसके लिए जिलाधिकारियों को सभी बैंकों को आवश्यक निर्देश जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सहायता वितरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों की सूची और सहायता का विवरण संबंधित जिलों की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। शासनादेश के अनुसार, इस योजना के लिए ₹2,000 करोड़ की बजटीय व्यवस्था तथा ₹5,500 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था के माध्यम से कुल ₹7,500 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे।सरकार के इस निर्णय से सूखे की स्थिति के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।





