
480 जॉब कार्डधारकों के सर्वेक्षण में 57% लाभार्थियों ने कम वेतन के कारण काम से दूरी बनाने की बात कही है। हालांकि, जो परिवार काम की मांग करते हैं, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का प्रतिशत 99.77% है। वर्ष 2019 से 2024 के बीच कुल 1 करोड़ 9 लाख 83 हजार परिवारों ने रोजगार की मांग की, जिनमें से 1 करोड़ 9 लाख 57 हजार परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया।
किस वर्ष में कितनी अनियमितताएँ?
| वर्ष | मामले | कितनी राशि का गबन? |
|---|---|---|
| 2019–20 | 226 | 1 करोड़ 14 लाख 50 हजार रुपये |
| 2020–21 | 152 | 1 करोड़ 18 लाख 56 हजार रुपये |
| 2021–22 | 223 | 1 करोड़ 36 लाख 61 हजार रुपये |
| 2022–23 | 130 | 1 करोड़ 37 लाख 18 हजार रुपये |
| 2023–24 | 353 | 4 करोड़ 11 लाख 35 हजार रुपये |
| कुल | 1,084 | 11 करोड़ 22 लाख 20 हजार रुपये |
इस अवधि में 5 करोड़ 65 लाख रुपये की वसूली अब तक नहीं हो सकी है।
बेरोजगारी भत्ता देने का प्रतिशत अत्यंत कम
काम की मांग करने के 15 दिनों के भीतर रोजगार न मिलने पर संबंधित परिवार को बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य है। रिपोर्ट के अनुसार, 2019-24 के दौरान कुल 34 लाख 85 हजार रुपये का भत्ता दिया जाना अपेक्षित था, लेकिन वास्तव में केवल 2 हजार 268 रुपये ही दिए गए। 34 लाख 83 हजार रुपये अब भी बकाया हैं।
रोजगार गारंटी योजना क्या है?
‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ केंद्र सरकार की एक योजना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी देती है। यह योजना ग्रामीण बेरोजगारी कम करने, महिला सशक्तिकरण बढ़ाने और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के उद्देश्य से चलाई जाती है। 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी ग्रामीण निवासी इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है।



