चेक बाऊंस केस में अकोला न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय; आरोपी को ३ लाख का जुर्माना के साथ ही ६ महिने का सश्रम कारावास – शिकायत कर्ता की ओर से एड. पियुष सांगाणी ने की पैरवी

lawyer-judgeअकोला- कोठडी बजार में नमक के व्यापारी मो. हनीफ मो. इब्राहिम संचालक जी. एन. एन्टरप्राईजेस इनके यहां से आरोपी यवतमाल के मो. फिरोज मो. सिराज कोठी ने माल लेते समय माल के ऐवज में एक चेक २,५०,००० तथा ५०,००० का ऐसे दो चेक दिये थे। उक्त चेक को शिकायतकर्ता द्वारा बैंक में लगाने पर यह बाऊंस हुए, शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता पियुष सांगाणी द्वारा आरोपी को नोटीस भेज कर उक्त राशी देने की मांग की थी ।

आरोपी ने उक्त नोटीस का जवाब नहीं देने के बाद शिकायतकर्ता ने अकोला दिवाणी न्यायालय में क्रिमीनल केस नं. ३००९/२०१५ केस तथा १५३१/२०१५ दाखिल किया था, जिस का निकाल दि. ४ जून २०२१ को अकोला न्यायालय ने निर्णय सुनाते समय आरोपी को शिकायतकर्ता का पुरा पेमेंट के साथ ही ३ लाख का तथा ७० हजार का जुर्माना और ६ माह का सश्रम कारावास का फैसला सुनाया गया। धारा १३८ चेक बाऊंस के केस में इस तरह का निकाल न्याय के संदर्भ में सायटेशन के रूप में देखा जा सकता है। इस केस में फिर्यादी की ओर से एड. पियुष सांगाणी तथा आरोपी की ओर से एड- आर. बी. विसपुते ने पैरवी की।

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धारा- 138 (बी) क्या है एसे समजे 

इस धारा के अंतर्गत यह उल्लेख किया गया है कि जिस व्यक्ति को चेक प्राप्त होता है तथा वह चेक को जमा करने के लिए बैंक में लगाता है और चेक बाउंस हो जाता है ऐसी परिस्थिति में चेक को प्राप्त करने वाला व्यक्ति इस प्रकार के चेक के डिसऑनर होने की सूचना चेक को देने वाले व्यक्ति को प्रेषित करेंगा। इस प्रकार की सूचना लिखित में दी जाएगी। ऐसी सूचना जिस दिनांक को चेक बाउंस हुआ है उस दिनांक से 30 दिवस के भीतर चेक देने वाले व्यक्ति को दी जाएगी तथा ऐसी सूचना देने के 15 दिवस के बाद मुकदमा संस्थित किया जाए अर्थात जिस व्यक्ति ने चेक दिया है उस व्यक्ति को रुपयों का भुगतान करने के लिए 15 दिवस का समय दिया जाएगा यदि वह इन 15 दिवस के भीतर चेक बाउंस होने पर राशि का भुगतान नहीं करता है तो ऐसी स्थिति में चेक बाउंस का मुकदमा धारा 138 के अंतर्गत कोर्ट में संस्थित कर दिया जाएगा…
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत केस फाइल कीजिए अगर चेक जारी करने वाला पैसा देने से इनकार कर देता है या लीगल नोटिस का जवाब नहीं देता है, या फिर किसी भी प्रकार की बातें बना कर समय गुजारने की कोशिश करता है तो आप *निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138* के तहत सिविल कोर्ट में केस फाइल कर सकते हैं। इसके तहत आरोपी को 2 साल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। जुर्माने की राशि चेक की राशि का दोगुना हो सकती है।

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