मुंबई- मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरियों की पहचान और उनकी ट्रैकिंग के लिए एक नया सिस्टम तैयार किया है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि देश में हर EV बैटरी का अपना एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होगा। जिसे ‘बैटरी पैक आधार नंबर’ (BPAN) कहा जाएगा।यह नंबर 21 अंकों का होगा, जिससे बैटरी के बनने से लेकर उसके खराब होने या रिसाइकिल होने तक की पूरी जानकारी एक क्लिक पर मिल सकेगी।
मिनिस्ट्री की जारी ड्राफ्ट गाइडलाइंस के अनुसार, बैटरी बनाने वाली कंपनियों और इन्हें इंपोर्ट करने वालों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे हर बैटरी पैक को एक 21-कैरेक्टर का BPAN असाइन करें।यह नियम न केवल बाजार में बेची जाने वाली बैटरियों पर, बल्कि कंपनियों के खुद के इस्तेमाल के लिए बनाई गई बैटरियों पर भी लागू होगा।
बैटरी पर ऐसी जगह लगेगा नंबर, जहां से मिटाया न जा सके
- गाइडलाइंस के अनुसार, BPAN को बैटरी पैक पर ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जो आसानी से दिखाई दे।
- कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नंबर की लोकेशन ऐसी हो कि वह खराब न हो या उसे मिटाया न जा सके।
- इसके अलावा, कंपनियों को बैटरी का रीयल-टाइम डेटा भी BPAN के ऑफिशियल पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
रिसाइकिल होने पर नया BPAN नंबर मिलेगा
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बैटरी की पूरी लाइफ साइकिल पर नजर रखेगा। इसमें कच्चे माल की माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, इस्तेमाल और आखिरी में रिसाइकिलिंग की जानकारी स्टोर होगी।अगर किसी बैटरी को रिसाइकिल किया जाता है या उसे दूसरे काम के लिए दोबारा तैयार किया जाता है, तो उसे एक नया BPAN नंबर जारी किया जाएगा। इससे पुरानी और नई बैटरी के बीच पारदर्शिता बनी रहेगी।
2kWh से ऊपर की इंडस्ट्रियल बैटरियों पर भी नियम
भारत में लिथियम-आयन बैटरी की कुल डिमांड का 80% से 90% हिस्सा EV सेक्टर से आता है। इसलिए सरकार ने शुरुआती फेड में EV बैटरियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।गाइडलाइंस में यह भी सुझाव दिया गया है कि 2 kWh से ज्यादा कैपेसिटी वाली इंडस्ट्रियल बैटरियों पर भी यह नियम लागू किया जाना चाहिए।
AIS कमेटी स्टैंडर्ड तय करेगी
BPAN फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS) रूट का पालन किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। जिसमें बैटरी निर्माता, कार कंपनियां, रिसाइकिलर्स और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कमेटी तकनीकी बारीकियों और नियमों को एक समान लागू करने पर काम करेगी।
बैटरी की सेकंड लाइफ क्या है?
जब EV की बैटरी 70-80% कैपेसिटी पर आ जाती है, तो वह कार चलाने के लायक नहीं रहती। लेकिन इसे घरों में इन्वर्टर या सोलर पावर स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। BPAN से यह पता चलेगा कि कौन सी बैटरी अब कार से हटाकर दूसरे काम में ली जा सकती है।




