महाराष्ट्र ब्रेकिंग- अब स्कूल फीस में होगी 15 प्रतिशत की कटौती…

Maharashtra: स्कूल फीस में 15 प्रतिशत की कटौती की संभावना, अध्यादेश लाने की तैयारी में राज्य सरकार

राजस्थान की तर्ज पर फीस में कटौती और बढ़ी हुई फीस को रद्द करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को दिया था. जरूरी कदम उठाने के लिए 3 हफ्तों का समय दिया गया है.

मुंबई/नागपुर- महाराष्ट्र सरकार प्राइवेट स्कूलों की फीस में 15 प्रतिशत की कटौती करने से संबंधित बड़ा निर्णय लेने जा रही है. इस संबंध में वह अध्यादेश लाने की तैयारी कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को प्राइवेट स्कूलों की फीस में राजस्थान की तरह 15 प्रतिशत कटौती करने का आदेश दिया था. साथ ही कोरोना काल में स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस को भी रद्द करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया गया था. कोर्ट के इसी निर्देश का अब राज्य सरकार पालन करने वाली है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार राज्य का शिक्षा विभाग महाराष्ट्र के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी से चर्चा करके इस संबंध में निर्णय ले लेगा.

स्कूल फीस कम करने के लिए सरकार द्वारा अध्यादेश लाने की तैयारी

कोरोना काल में स्कूल बंद रहने की वजह से प्राइवेट स्कूलों की फीस में 15 प्रतिशत की कटौती करने के लिए सरकार अध्यादेश ला सकती है. प्राइवेट स्कूलों की फीस राज्य सरकार तय नहीं करती है. प्राइवेट स्कूलों में फीस तय करना राज्य सरकार का अधिकार नहीं है. लेकिन कोरोना काल में राज्य सरकार के आदेश के तहत स्कूल बंद हैं. इसलिए इस कालावधि में फीस कटौती का अधिकार राज्य सरकार अध्यादेश के माध्यम से लेने वाली है.

स्कूल शिक्षा विभाग ने इम मामले में महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी से कानूनी सलाह मांगी है. महाधिवक्ता ने अगर हरी झंडी दिखाई तो इसी हफ्ते मंत्रिमंडल की बैठक में अध्यादेश लाने के प्रस्ताव पर सहमति बनाई जा सकती है.

फीस कटौती को लेकर 3 हफ्ते में निर्णय लें- सुप्रीम कोर्ट

कोरोना काल में आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से महाराष्ट्र के अभिभावकों के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है. फीस में कटौती और बढ़ी हुई फीस को रद्द करने का यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को दिया था. अदालत ने शिक्षा का बाजारीकरण करने वाले स्कूल और उनकी मदद करने वाले अधिकारियों और नेताओं को फटकार लगाते हुए यह निर्देश दिया है कि 3 हफ्तों के अंदर जरूरी कदम उठा लिए जाएं. सुप्रीम कोर्ट की इस पहल को याचिकाकर्ता अभिभावक जयश्री देशपांडे और प्रसाद तुलसकर ने ऐतिहासिक बताया.

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