भारत में मिला कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ‘सुपर इन्फेक्शियस’; ब्रिटेन में मिले अल्फा वैरिएंट से भी 50% तेज रफ्तार से शरीर में इन्फेक्शन फैलाता है

coronaनई दिल्ली (दिव्य हिन्दी)- भारत में मिला कोरोना का वैरिएंट डेल्टा सुपर इन्फेक्शियस है। इसने ही भारत में 1.80 लाख से अधिक लोगों की जान ली है। भारत में दूसरी लहर 11 फरवरी से शुरू हुई थी और अप्रैल में भयावह हो गई थी। इसी के चलते देश के अधिकांश राज्यों में लॉकडाउन है या कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

भारत में कोरोना के वैरिएंट्स की स्टडी के लिए बने SARS-CoV-2 जीनोमिक कंसोर्टिया (INSACOG) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के वैज्ञानिकों ने स्टडी की है। इसके आधार पर ही उन्होंने दावा किया कि अब तक कोरोना के अल्फा (यूके में मिले) वैरिएंट को सबसे ज्यादा इन्फेक्शियस माना जा रहा था। पर भारत में मिला डेल्टा (डबल म्यूटेंट) वैरिएंट उससे भी 50% ज्यादा इंफेक्शियस है।

अब राज्य सरकारे क्या करेगी?

  • स्टडी के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्कता बढ़ाने की सलाह दी गई है। खासकर, विदेश से आने वाले यात्रियों के पॉजिटिव मिलने पर उनके सैम्पल कलेक्ट करने को कहा गया है, ताकि उनकी जीनोम सिक्वेंसिंग कर नए वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न का पता लगाया जा सके।
  • राज्यों को दी गई जानकारी के अनुसार डेल्टा वैरिएंट सभी राज्यों में मौजूद है। पर इसने दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना में अधिक लोगों को प्रभावित किया है। इन राज्यों में ही दूसरी लहर से सबसे अधिक नुकसान भी हुआ है।

अब तक वैज्ञानिकों को क्या पता चला है जाने और समजे ?

दो हफ्ते पहले तक भारत में कई वैरिएंट्स पॉजिटिव केस का कारण बन रहे थे। जीनोमिक डेटा बताता है कि यूके में सबसे पहले नजर आया B.1.1.7 वैरिएंट दिल्ली और पंजाब में सक्रिय था। वहीं, B.1.618 पश्चिम बंगाल में और B.1.617 महाराष्ट्र में केस बढ़ा रहा था।

बाद में B.1.617 ने पश्चिम बंगाल में B.1.618 को पीछे छोड़ दिया और ज्यादातर राज्यों में प्रभावी हो गया है। दिल्ली में भी यह तेजी से बढ़ा है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के डायरेक्टर सुजीत सिंह ने 5 मई को दिल्ली में पत्रकारों से कहा था कि केस 3-4 लाख तक पहुंचे तो उसके लिए B.1.617 ही जिम्मेदार है।

WHO के अनुसार भारत में 0.1% पॉजिटिव सैम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग की गई। ताकि वैरिएंट्स का पता चल सके। अप्रैल 2021 के बाद भारत में सीक्वेंस किए गए सैम्पल्स में 21% केसेज B.1.617.1 के और 7% केसेज B.1.617.2 के थे। यानी केस में बढ़ोतरी के लिए यह जिम्मेदार है।

सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के वायरोलॉजिस्ट और भारतीय SARS-CoV-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टिया (INSACOG) के प्रमुख शाहिद जमील का कहना है कि B.1.617 वैरिएंट्स तेजी से नए केस बढ़ा रहा है क्योंकि यह अन्य के मुकाबले ज्यादा फिट है। वहीं यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के वायरोलॉजिस्ट रवींद्र गुप्ता भी कहते हैं कि इस वैरिएंट की ट्रांसमिशन क्षमता सबसे ज्यादा है।

सबसे पहले यह वैरिएंट किसे और कैसे मिला यह भी समजना जरुरी ?

  • डेल्टा वैरिएंट को भारतीय वैज्ञानिकों ने सबसे पहले महाराष्ट्र से अक्टूबर 2020 में लिए कुछ सैम्पल्स में पकड़ा था। INSACOG ने जनवरी में अपनी सक्रियता बढ़ाई तो पता चला कि महाराष्ट्र में बढ़ते मामलों के पीछे B.1.617 ही जिम्मेदार है।
  • पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की डायरेक्टर प्रिया अब्राहम के अनुसार 15 फरवरी तक महाराष्ट्र में 60% केसेज के लिए B.1.617 ही जिम्मेदार था। इसके बाद इसके सब-लाइनेज सामने आते चले गए।
  • 3 मई को एक स्टडी में NIV वैज्ञानिकों ने दावा किया कि इस वैरिएंट ने स्पाइक प्रोटीन, जिससे वायरस इंसान के शरीर के संपर्क में आता है, में 8 म्यूटेशन किए हैं। इसमें दो म्यूटेशंस यूके और दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट्स जैसे थे। वहीं, एक म्यूटेशन ब्राजील वैरिएंट जैसा था, जो इसे इम्युनिटी और एंटीबॉडी को चकमा देने में मदद करता है। अगले ही दिन जर्मनी की एक टीम ने भी अपनी स्टडी में इस दावे का समर्थन किया।

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