
सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के अनुसार, इस प्रणाली से उत्तरपुस्तिकाओं के परिवहन में लगने वाला समय और खर्च बचेगा। साथ ही शिक्षक अपने स्कूल में रहकर ही मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। बोर्ड का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित बनाना है।
ऐसे होगी ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया
पहला चरण:
छात्र परीक्षा केंद्र पर पहले की तरह ऑफलाइन कॉपी में उत्तर लिखेंगे। विषय के अनुसार 40, 32 या 20 पेज की उत्तरपुस्तिका दी जाएगी।
दूसरा चरण:
सभी कॉपियों को हाई सिक्योरिटी स्कैनिंग सेंटर (स्कूल के कंप्यूटर लैब) में स्कैन किया जाएगा। हर पेज की डिजिटल इमेज बनेगी और प्रत्येक कॉपी को यूनिक कोड दिया जाएगा। जांच के दौरान छात्र का नाम और रोल नंबर दिखाई नहीं देगा, जिससे पक्षपात की संभावना समाप्त होगी।
तीसरा चरण:
शिक्षक ओएसिस आईडी के माध्यम से ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल पर लॉगइन करेंगे। सिस्टम उन्हें बताएगा कि कितनी कॉपियां जांचनी हैं।
चौथा चरण:
स्कैन की गई कॉपी स्क्रीन पर दिखाई देगी। प्रत्येक प्रश्न के लिए अलग अंक कॉलम होगा। शिक्षक द्वारा दर्ज किए गए अंक स्वतः सिस्टम में सेव हो जाएंगे।
पांचवां चरण:
कुल अंकों की गणना सिस्टम स्वयं करेगा। शिक्षकों को टोटलिंग नहीं करनी होगी।
छठा चरण:
कुछ कॉपियों को मॉडरेशन या री-चेकिंग के लिए वरिष्ठ परीक्षक को भेजा जा सकता है। मूल्यांकन का पूरा रिकॉर्ड सिस्टम में सुरक्षित रहेगा।
सातवां चरण:
अंक सीधे सीबीएसई के रिजल्ट डेटाबेस में ट्रांसफर हो जाएंगे। इससे मैनुअल एंट्री या दोबारा सत्यापन की आवश्यकता नहीं रहेगी और परिणाम कम विवाद के साथ घोषित किए जा सकेंगे।
कंप्यूटर लैब अनिवार्य, शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण
डिजिटल मूल्यांकन के लिए स्कूलों में कंप्यूटर लैब, लेटेस्ट इंटरनेट ब्राउजर, एडोब रीडर, न्यूनतम 2 एमबीपीएस की स्थिर इंटरनेट स्पीड और निर्बाध बिजली व्यवस्था अनिवार्य होगी।सभी ओएसिस आईडी धारक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए ड्राई रन आयोजित किए जाएंगे, कॉल सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं और बोर्ड द्वारा निर्देशात्मक वीडियो भी जारी किए जा रहे हैं।सीबीएसई का मानना है कि यह नई प्रणाली परीक्षा मूल्यांकन को आधुनिक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी।



