वजन घटाने के नाम पर आंख मूंदकर न खाएं इसबगोल! पर्याप्त पानी के बिना सेवन पड़ सकता है भारी

कब्ज से राहत और वजन नियंत्रण के दावों के बीच सावधानी जरूरी; गले या आंतों में रुकावट का खतरा, नियमित दवाएं लेने वाले पहले चिकित्सक से लें सलाह

कब्ज, पेट साफ न होने और पाचन संबंधी समस्याओं में इस्तेमाल होने वाला इसबगोल आजकल वजन घटाने के दावों को लेकर भी चर्चा में है। ओजेम्पिक जैसी वजन घटाने वाली दवाओं की लोकप्रियता के बीच सामाजिक माध्यमों पर इसे ‘प्रकृति का ओजेम्पिक’ कहा जा रहा है। दावा है कि इसबगोल भूख नियंत्रित करने और वजन कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके सेवन को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है।

पर्याप्त पानी के बिना सेवन खतरनाक

इसबगोल पानी सोखकर फूलता है और जेल जैसा पदार्थ बनाता है। इसलिए इसका सेवन पर्याप्त मात्रा में पानी के साथ करना जरूरी है। कम पानी के साथ या सूखे रूप में निगलने पर यह गले या भोजन नली में फूलकर अटक सकता है। इससे निगलने और सांस लेने में परेशानी तथा गंभीर स्थिति में रुकावट का खतरा पैदा हो सकता है।

इन लोगों को विशेष सावधानी जरूरी

  • जिन्हें निगलने में कठिनाई होती है, वे बिना चिकित्सकीय सलाह इसका सेवन न करें।
  • आंतों में रुकावट या गंभीर पाचन संबंधी समस्या से पीड़ित लोगों को इससे बचना चाहिए।
  • नियमित दवाएं लेने वाले लोग इसबगोल शुरू करने से पहले चिकित्सक या औषध विशेषज्ञ से सलाह लें। यह कुछ दवाओं के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है।
  • सेवन के बाद सीने में दर्द, उल्टी, निगलने या सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
  • पेट दर्द, मल त्याग में लगातार परेशानी या कब्ज लंबे समय तक बने रहने पर केवल इसबगोल के भरोसे न रहें।

वजन घटाने का चमत्कारी उपाय नहीं

वर्ष 2023 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक समीक्षा में भोजन से पहले औसतन 10.8 ग्राम इसबगोल का पांच महीने तक सेवन करने से वजन घटाने में संभावित लाभ का उल्लेख किया गया है। पानी के संपर्क में आने पर इसके रेशे फूलकर पेट भरा होने का एहसास करा सकते हैं, जिससे भूख और भोजन की मात्रा नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन इसबगोल और ओजेम्पिक की कार्यप्रणाली अलग है। इसबगोल एक आहार रेशा है, जबकि ओजेम्पिक एक चिकित्सकीय दवा है। इसलिए इसबगोल को वजन घटाने वाली दवाओं का विकल्प समझना गलत होगा।

घरेलू उपाय है, लेकिन लापरवाही नहीं

पश्चिमी एशिया में उत्पन्न इसबगोल का पौधा सदियों पहले भारत पहुंचा था। आज भारत इसका प्रमुख उत्पादक और निर्यातक देश है। कब्ज से राहत के लिए इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, प्राकृतिक या घरेलू उत्पाद होने का अर्थ यह नहीं कि उसका सेवन बिना सावधानी के किया जाए। वजन नियंत्रण के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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