गोपीनाथ मुंडे किसान दुर्घटना सुरक्षा योजना का दायरा बढ़ा, अब भूमिहीन खेत मजदूर और महिला किसान भी पात्र

मुंबई- महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग की ओर से संचालित “गोपीनाथ मुंडे किसान दुर्घटना सुरक्षा सानुग्रह अनुदान योजना” में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। मंत्रिमंडल की बैठक में योजना को अधिक व्यापक बनाते हुए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक पांच वर्ष की अवधि के लिए फिर से लागू करने को मंजूरी दी गई है। इस संबंध में कृषि विभाग की ओर से शासन निर्णय जारी किया गया है।

योजना का दायरा बढ़ा

पहले यह योजना केवल 7/12 उतारा वाले खातेदार किसानों तथा उनके परिवार के एक सदस्य तक सीमित थी। अब खेती से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अन्य वर्गों को भी इसमें शामिल किया गया है।संशोधित योजना के तहत राज्य के सभी वहितीधारक खातेदार किसान, भूमिहीन खेत मजदूर तथा महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तीकरण अधिनियम, 2026 के तहत “महिला किसान” प्रमाणपत्र प्राप्त महिला किसान पात्र होंगे।इसके साथ ही पात्र किसान के परिवार के 10 से 75 वर्ष की आयु के सभी सदस्यों को भी योजना में शामिल किया गया है। इनमें माता-पिता, पति या पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री, तलाकशुदा पुत्री तथा विधवा पुत्री शामिल हैं।

दुर्घटना में दो लाख रुपये तक सहायता

योजना के तहत दुर्घटना की स्थिति के अनुसार सानुग्रह अनुदान दिया जाएगा।

  • दुर्घटना में मृत्यु: 2 लाख रुपये

  • दोनों आंखें अथवा दोनों हाथ या दोनों पैर निष्क्रिय होने पर: 2 लाख रुपये

  • एक आंख तथा एक हाथ या एक पैर निष्क्रिय होने पर: 2 लाख रुपये

  • एक आंख अथवा एक हाथ या एक पैर निष्क्रिय होने पर: 1 लाख रुपये

कई प्रकार की दुर्घटनाएं योजना में शामिल

योजना के अंतर्गत सड़क एवं रेल दुर्घटना, पानी में डूबने से मृत्यु, कीटनाशक अथवा अन्य कारणों से विषबाधा, बिजली का झटका, बिजली गिरने से मृत्यु, हत्या, ऊंचाई से गिरने के कारण मृत्यु, सर्पदंश एवं बिच्छू के काटने की घटना, नक्सलवादियों द्वारा हत्या, पशुओं के हमले से घायल होना अथवा मृत्यु, प्रसव के दौरान मृत्यु, दंगों में मृत्यु या दिव्यांगता, आकस्मिक दुर्घटना के कारण आंतरिक रक्तस्राव तथा लू लगने से होने वाली घटनाओं को शामिल किया गया है।

दुर्घटना के दो महीने के भीतर करना होगा आवेदन

योजना का लाभ लेने के लिए दुर्घटना होने के बाद संबंधित किसान, भूमिहीन खेत मजदूर, महिला किसान अथवा उनके परिवार के वारिस को आवश्यक दस्तावेजों के साथ पूर्ण प्रस्ताव दो महीने के भीतर संबंधित तालुका कृषि अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य होगा।प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद तहसीलदार की अध्यक्षता वाली तालुकास्तरीय समिति के माध्यम से लाभ देने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समिति द्वारा 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का प्रावधान है।

बैंक खाते में सीधे जमा होगी सहायता राशि

स्वीकृत लाभार्थियों को सानुग्रह अनुदान की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जाएगी।कृषि विभाग ने राज्य के अधिक से अधिक पात्र किसानों, भूमिहीन खेत मजदूरों और महिला किसानों से इस संशोधित एवं विस्तारित योजना का लाभ लेने की अपील की है।

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