बड़ी खबर: सरकार ने तुकाराम मुंधे के फैसले को निलंबित किया, अतिरिक्त तेल की बिक्री पर 1 साल की छूट!

मुंबई- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंधे की ओर से खाद्य तेल में मिलावट रोकने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त खाद्य तेल की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के फैसले को राज्य सरकार ने फिलहाल एक साल के लिए स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ खाद्य तेल महासंघ के पदाधिकारियों की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।अतिरिक्त खाद्य तेल की बिक्री पर रोक के फैसले का तेली समुदाय और पारंपरिक तेल विक्रेताओं ने विरोध किया था। उनका कहना था कि अतिरिक्त तेल की बिक्री उनका पारंपरिक व्यवसाय है और इस माध्यम से बड़ी संख्या में गरीब तथा निम्न आय वर्ग के ग्राहक तेल खरीदते हैं। प्रतिबंध से छोटे और मध्यम व्यापारियों के साथ महिला विक्रेताओं को भी परेशानी होने की आशंका जताई गई थी।

एक साल की अस्थायी छूट

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि अतिरिक्त खाद्य तेल की बिक्री से संबंधित कानून वर्ष 2011 में बनाया गया था। खाद्य तेल की गुणवत्ता बनाए रखना इस कानून का महत्वपूर्ण उद्देश्य है, लेकिन गरीब उपभोक्ताओं की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने फिलहाल एक साल की अस्थायी छूट देने का निर्णय लिया है।मुख्यमंत्री ने खाद्य तेल विक्रेताओं से इस अवधि का उपयोग अपने कारोबार में आवश्यक बदलाव करने के लिए करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साल की अवधि समाप्त होने के बाद छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और संबंधित कानून का पालन करना अनिवार्य होगा।

एफडीए और व्यापारियों की संयुक्त समिति बनेगी

पारंपरिक खाद्य तेल व्यापारियों को कानून के अनुरूप अपने व्यवसाय में किस तरह के बदलाव करने होंगे, यह तय करने के लिए एफडीए और व्यापारियों की संयुक्त समिति गठित की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार भी समिति को सहयोग करेगी।समिति के माध्यम से गुणवत्ता, बिक्री प्रक्रिया और पारंपरिक व्यापारियों के हितों के बीच संतुलन बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा।

व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया

खाद्य तेल महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया कि बैठक में महासंघ की ओर से प्रतिबंध हटाने की मांग रखी गई थी। मुख्यमंत्री ने फिलहाल एक साल की राहत दी है। उन्होंने कहा कि समिति में व्यापारियों के प्रतिनिधियों के साथ संबंधित अधिकारी और अन्य घटक शामिल होंगे।

ठक्कर के अनुसार, लोगों के बीच यह धारणा है कि अतिरिक्त खाद्य तेल मिलावटी होता है, जबकि व्यापारियों का कहना है कि वे मिलावट नहीं करते। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध से छोटे, मध्यम और महिला विक्रेताओं के सामने रोजगार और कारोबार से जुड़ी कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।अब अगले एक वर्ष में गठित समिति इस कारोबार को कानून के दायरे में लाने और खाद्य तेल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर निर्णय लेगी।

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