
नई दिल्ली- यदि आप Google Pay, PhonePe, Paytm या किसी अन्य यूपीआई (UPI) ऐप के जरिए डिजिटल भुगतान करते हैं, तो आपके लिए महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने सभी बैंकों और यूपीआई सेवा प्रदाताओं को 4 सितंबर 2026 तक अपने सिस्टम में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं, ताकि लेनदेन के दौरान ग्राहकों का पूरा मोबाइल नंबर दिखाई न दे।
नए नियम लागू होने के बाद किसी भी यूपीआई ट्रांजैक्शन में भुगतान प्राप्त करने या भेजने वाले व्यक्ति को मोबाइल नंबर के केवल अंतिम चार अंक ही दिखाई देंगे, जबकि शेष नंबर छिपा रहेगा। इस बदलाव का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना है।
QR भुगतान और UPI आईडी में भी बदलाव
NPCI के निर्देश केवल मोबाइल नंबर तक सीमित नहीं हैं। अब QR कोड से भुगतान करने पर भी पूरा मोबाइल नंबर प्रदर्शित नहीं होगा। इसके अलावा बैंक खाता संख्या और UPI आईडी जैसी संवेदनशील जानकारी भी मास्क (छिपाकर) दिखाई जाएगी।इसके साथ ही नए यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए मोबाइल नंबर आधारित UPI ID की बजाय यूजरनेम आधारित UPI ID को डिफॉल्ट विकल्प बनाया जाएगा। इससे लेनदेन के दौरान उपयोगकर्ता की पहचान और मोबाइल नंबर दोनों पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित रहेंगे।
गोपनीयता की सुरक्षा के लिए लिया गया फैसला
बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में कई उपयोगकर्ताओं, विशेषकर महिलाओं ने शिकायत की थी कि यूपीआई भुगतान के बाद उनका मोबाइल नंबर दूसरे व्यक्ति को दिखाई देता है, जिससे अनचाहे कॉल, संदेश और पहचान संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।इन्हीं चिंताओं को देखते हुए और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के अनुरूप उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। NPCI बैंकों और यूपीआई ऐप डेवलपर्स के साथ मिलकर आवश्यक तकनीकी बदलाव लागू कर रहा है।
55 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर
भारत का यूपीआई नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में शामिल है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, देश में 55 करोड़ से अधिक लोग यूपीआई का उपयोग करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूपीआई के माध्यम से लगभग 314 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन दर्ज किए गए।हालांकि, NPCI ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करने वाले बैंकों या यूपीआई ऐप्स पर क्या कार्रवाई होगी। यह भी साफ नहीं किया गया है कि पहले से मौजूद मोबाइल नंबर आधारित UPI IDs को बदला जाएगा या यह नियम केवल नए उपयोगकर्ताओं पर लागू होगा।



