मुंबई / पुणे – राज्य में किसानों को नकली बीज, खाद और कीटनाशक बेचने का संगठित खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, असली कंपनियों के उत्पादों जैसी दिखने वाली पैकिंग तैयार कर असली माल के साथ नकली कीटनाशक ,बिज और खाद बाजार में उतारे जा रहे हैं। इन उत्पादों पर असली कंपनियों की तरह ही बैच नंबर, प्रिंटिंग और लेबलिंग की जाती है, जिससे किसान असली और नकली माल में अंतर नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल कुछ विशेष मार्केटिंग कंपनियों के माध्यम से संचालित होने की आशंका है। अभी हाल ही में उजागर हुई छत्रपति संभाजी नगर की घटना इस का बड़ा उदाहरण है
बताया जा रहा है कि कई मामलों में असली माल के बीच नकली पैकेट मिलाकर बिक्री की जाती है, जिससे संदेह होना भी मुश्किल हो जाता है। इस नेटवर्क में फर्जी बिल, डुप्लीकेट पैकिंग, नकली बैच नंबर और फर्जी जीएसटी इनवॉइस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का आरोप है कि कृषि विभाग की जांच अक्सर केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रहती है। वास्तविक सप्लाई चैन, खरीद-बिक्री के बिल, इनवॉइस, स्टॉक रजिस्टर, ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड और माल की उत्पत्ति की गहराई से जांच नहीं की जाती, जिसके कारण ऐसे रैकेट लगातार सक्रिय बने हुए हैं।मांग की जा रही है कि कृषि विभाग कंपनियों से लेकर डीलर, वितरक और गोदाम स्तर तक पूरे नेटवर्क की व्यापक जांच करे। विशेष रूप से बैच नंबर की सत्यता, जीएसटी इनवॉइस, ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री दस्तावेजों का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाए, ताकि किसानों तक पहुंच रहे नकली माल का पर्दाफाश हो सके।
साथ ही राज्य के कृषि सचिव, आयुक्त कृषि तथा कृषि संचालक (निविष्ठा व गुण नियंत्रण) इस गंभीर मामले पर विशेष ध्यान दें और अन्य राज्य से बनकर आ रहे माल की जाँच के लिए राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करें, ऐसी मांग किसान संगठनों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा की जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नकली बीज, खाद और कीटनाशकों का यह कारोबार किसानों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर रहा है और उनकी मेहनत पर सीधा हमला है। खराब या नकली कृषि उत्पादों के कारण फसल नुकसान, कर्ज बढ़ना और आर्थिक संकट जैसी गंभीर परिस्थिति पैदा हो रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि इस रैकेट पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो खेती और किसानों दोनों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
5 गंभीर सवाल
राज्य में बाहरी राज्यों से जिन कंपनियों से यह माल बनकर आ रहा है, उन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और उत्पादन केंद्रों की सेन्ट्रल एजेंसी द्वारा गहन जांच हो।
यह पता लगाया जाए कि क्या एक ही कंपनी अलग-अलग मार्केटिंग कंपनियों के नाम से समान उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचे जा रहे है?
एक ही उत्पादन अलग-अलग कंपनियों के नाम, पैकिंग और ब्रांडिंग के साथ बेचा जा रहा है, यह किसानों को भ्रमित करने और वास्तविक निर्माता को छिपाने का गंभीर मामला है।“Manufactured By” और “Marketed By” के नाम पर किसानों के बीच भरोसे का खेल खेला जा रहा .विशेषज्ञों का कहना है कि कई उत्पादों की पैकिंग, सामग्री और गुणवत्ता समान होने के बावजूद केवल कंपनी का नाम बदलकर बाजार में उतारा जा रहा है।




