गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुचारू रखने के लिए राज्यभर में कंट्रोल रूम, जिला स्तरीय समितियां गठित

मुंबई- ईरान-इजराइल युद्ध की पृष्ठभूमि में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य के अन्न, नागरी आपूर्ति एवं ग्राहक संरक्षण विभाग ने गैस आपूर्ति की निगरानी और समन्वय के लिए राज्यभर में नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) शुरू करने तथा जिला स्तर पर विशेष समितियां गठित करने का निर्णय लिया है।विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने संबंधित सभी यंत्रणाओं को एलपीजी की आपूर्ति सुचारू रखने और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि राज्य में घरेलू एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है और गैस सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

मार्च महीने में पिछले छह महीनों की तुलना में अधिक मात्रा में घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए हैं। युद्ध की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलास्तर पर विशेष समितियां

गैस आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा न आए और संभावित कमी की स्थिति में समन्वय बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला आपूर्ति अधिकारी तथा सरकारी गैस कंपनियों के अधिकारियों को शामिल करते हुए जिला स्तरीय समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां गैस आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का काम करेंगी।

मुंबई-ठाणे रेशनिंग क्षेत्र में नियंत्रक (रेशनिंग) के अधीन समिति गठित की जाएगी, जिसमें पुलिस उप आयुक्त और उपनियंत्रक (रेशनिंग) शामिल रहेंगे।

आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता

सरकार ने अस्पतालों, सरकारी छात्रावासों, स्कूल-कॉलेज की मेस, मध्याह्न भोजन योजना, आश्रमशालाओं और अन्य आवश्यक सेवाएं देने वाली संस्थाओं को एलपीजी आपूर्ति में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके लिए अलग से प्राथमिकता सूची भी तैयार की जाएगी।

अफवाहों पर कार्रवाई

गैस की कमी को लेकर अफवाहें न फैलें, इसके लिए रोजाना रेडियो, एफएम, दूरदर्शन और प्रिंट मीडिया के माध्यम से जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर फैलने वाली झूठी या भ्रामक खबरों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने के निर्देश

गैस बुकिंग ऐप और मिस्ड कॉल सेवा में आने वाली तकनीकी समस्याओं को तत्काल दूर करने के निर्देश तेल कंपनियों को दिए गए हैं। इसके अलावा राज्य, विभाग, जिला और तालुका स्तर पर नियंत्रण कक्ष शुरू किए जाएंगे और शिकायतों के समाधान के लिए व्हाट्सऐप सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

राज्य में गैस की कोई कमी नहीं

महाराष्ट्र में प्रतिदिन औसतन लगभग 9,000 मीट्रिक टन एलपीजी की मांग होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनरी में उत्पादन बढ़ाकर 11,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया है। इसलिए राज्य में घरेलू एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है।इसके अलावा पाइप्ड नेचरल गैस (पीएनजी), पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। राज्य की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और बाजार की मांग पूरी की जा रही है।सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि गैस या ईंधन की कमी को लेकर किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और घबराने की आवश्यकता नहीं है।

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