राज्य में ‘महाराष्ट्र मुद्रांक सुधारणा विधेयक 2026’ मंजूर

महाराष्ट्र में लंबित मुद्रांक मामलों के निपटारे को मिलेगी रफ्तार

मुंबई- महाराष्ट्र में स्टाम्प शुल्क विभाग के लंबित मामलों के जल्द निपटारे और प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे द्वारा प्रस्तुत “महाराष्ट्र मुद्रांक सुधारणा विधेयक 2026” को आज विधानसभा में सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इससे पहले विधान परिषद ने भी इस विधेयक को अपनी सहमति दे दी थी।इस संशोधन के तहत स्थानीय स्तर के अधिकारियों के आर्थिक अधिकारों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इसके कारण स्टाम्प शुल्क से जुड़े कई मामलों को अब नोंदणी महानिरीक्षक (IGR) स्तर तक भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनका निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा।

सरकार ने मौजूदा कानून की धारा 52 ‘अ’ में संशोधन कर प्रशासनिक अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया है। इससे IGR कार्यालय पर पड़ने वाला काम का बोझ कम होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।

संशोधित आर्थिक सीमा

जिलाधिकारी (स्टाम्प): 5 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये

उप महानिरीक्षक (मुंबई को छोड़कर): 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये

अपर स्टाम्प नियंत्रक (मुंबई): 20 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये

मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी: 20 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये

‘तारीख पर तारीख’ की समस्या होगी खत्म

विधेयक पर चर्चा के दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि अभी कई मामले केवल कम आर्थिक सीमा के कारण IGR के पास लंबित रहते हैं। इसके चलते नागरिकों को बार-बार मुंबई के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उन्हें काफी परेशानी होती है।उन्होंने कहा कि अब जिलाधिकारी और उप महानिरीक्षक स्तर पर ही बड़े मामलों का निपटारा हो सकेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबित मामलों का ढेर तेजी से कम होगा।

विधानसभा में विधेयक क्रमांक 9 (2026) को धारा-वार विचार के बाद बहुमत से पारित किया गया। इसके साथ ही “महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2026” (विधेयक क्रमांक 2) भी सदन में प्रस्तुत किया गया।सरकार का कहना है कि इन ऐतिहासिक सुधारों से राजस्व विभाग के काम में तेजी आएगी और संपत्ति खरीद-फरोख्त से जुड़े तकनीकी मामलों के समाधान में भी आसानी होगी।

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