बड़ी खबर! फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र जमा करने के आरोप में 316 अधिकारियों को निलंबित किया गया

मुंबई- सरकार ने फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र जमा करने वाले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को करारा झटका दिया है। मंत्री अतुल सावे ने बताया कि 40 प्रतिशत से कम विकलांगता वाले और फर्जी प्रमाण पत्र जमा करने वाले 316 लोगों को निलंबित कर दिया गया है। भाजपा विधायक श्रीकांत भारतीय ने लिखित प्रश्न के माध्यम से यह मुद्दा उठाया था।सत्यापन के बाद, राज्य की 28 जिला परिषदों में बिना प्रमाण पत्र, फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र और 40 प्रतिशत से कम विकलांगता वाले 316 अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। 

भाजपा विधायक श्रीकांत भारतीय ने इस संबंध में लिखित प्रश्न उठाया था। मंत्री अतुल सावे द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में स्पष्ट किया गया कि 28 जिला परिषदों की अंतरिम रिपोर्ट में 10,922 दिव्यांग अधिकारियों को पंजीकृत किया गया है। 6,218 कर्मचारियों का सत्यापन पूरा हो चुका है। इनमें से 316 अधिकारियों को प्रमाण पत्र न होने, फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र और 40 प्रतिशत से कम दिव्यांग पाए जाने के कारण निलंबित किया गया है।

राज्य सरकार को अभी भी लगभग 5,000 अधिकारियों का सत्यापन करना बाकी है। इसलिए, फर्जी प्रमाण पत्र जमा करने वाले अधिकारियों में से, 

तुकाराम मुंधे अभियान: फर्जी विकलांग व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई

राज्य के दिव्यांग कल्याण विभाग ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के मामलों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सचिव तुकाराम मुंधे ने राज्य की सभी 34 जिला परिषदों को लिखित आदेश जारी कर दिव्यांग प्रमाण पत्रों का व्यापक सत्यापन करने का निर्देश दिया है। राज्य में दिव्यांग योजनाओं का धोखाधड़ी से लाभ उठाने वालों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया गया है और 18 सितंबर, 2025 को सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को आदेश भेज दिए गए थे। आदेश प्राप्त होते ही जिला परिषद स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

तुकाराम मुंडे ने राज्य के सभी 34 जिला परिषदों (जेडपी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को विकलांगता प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि इस सत्यापन में शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्माण सहित सभी विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल होंगे।

विकलांगता प्रमाण पत्रों के आधार पर विभिन्न सरकारी रियायतें प्राप्त की जा रही हैं, जिसके कारण फर्जी प्रमाण पत्र प्राप्त करने वालों में भय का माहौल बन गया है। प्रमाण पत्र जारी करने वाले संबंधित अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जाएगी।

दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 91 के अनुसार, यदि फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को 2 वर्ष तक की कारावास की सजा या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here