मुंबई- महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 2026 सोमवार को एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व राजनीतिक परिस्थिति के बीच शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ हुई। सदन की कार्यवाही ‘वंदे मातरम’, ‘राष्ट्रगान’ और राज्य गीत ‘जय जय महाराष्ट्र माझा’ की गूंज के साथ शुरू हुई। राज्यपाल ने अपने संबोधन की शुरुआत मराठी में की और बाद में वे हिंदी में बोलने लगे।
महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र 2026 के लिए मुंबई स्थित विधानसभा परिसर पहुंचने पर महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वागत किया। इस मौके पर गवर्नर को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। 6 मार्च को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य का बजट पेश करेंगे।
सत्र के दौरान विपक्ष के आक्रामक रुख अपनाने की संभावना है। अजित दादा के विमान दुर्घटना प्रकरण, मंत्रालय में कथित भ्रष्टाचार, किसान कर्जमाफी और मुलुंड मेट्रो दुर्घटना जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा तो जाएगा लेकिन इस बीच बजट में किसानों की कर्जमाफी की घोषणा होने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
लक्ष्य 2030 तक 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास जताया है कि इस बार का बजट आम जनता को राहत देने वाला और आर्थिक अनुशासन बनाए रखने वाला होगा। उन्होंने कहा कि दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा सुझाए गए मुद्दों और सुझावों को भी बजट में शामिल किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर वित्तीय अनुशासन के लिए कड़े कदम भी उठाए जाएंगे। सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक विस्तारित करने का लक्ष्य रखा है। इस विजन के हिस्से के रूप में, सरकार का लक्ष्य 2030 तक 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना और लगभग 50 लाख रोजगार के अवसर पैदा करना है। जनवरी 2026 में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच के दौरान लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे 40,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
कर्नाटक सीमा विवाद हल करने की कही बात
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राजमाता जीजाऊ, छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर और भगवान बिरसा मुंडा जैसे समाज सुधारकों के आदर्शों से निर्देशित होगी। उन्होंने महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को हल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में पूरा सहयोग दिया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रसिद्ध वकीलों को नियुक्त किया गया है।
सदन में ‘विपक्ष का नेता’ न होना बना इतिहास
इस बजट सत्र की सबसे खास और पहली बार होने वाली बात यह है कि राज्य के इतिहास में पहली बार विधानसभा और विधान परिषद दोनों में ‘विपक्ष का नेता’ (LoP) नहीं है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि विपक्षी गठबंधन सदन में इस पद के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या बल हासिल करने में विफल रहा। महा विकास अघाड़ी (MVA) ने इस स्थिति को लोकतांत्रिक मानदंडों के लिए खतरा बताया है, उनका तर्क है कि संस्थागत संतुलन बनाए रखने के लिए विपक्ष के नेता की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है।
2026 का बजट सत्र: कुल 15 विधेयक
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस सत्र में कुल 15 विधेयक पेश किए जाएंगे।
विधानसभा में लंबित विधेयक – 2
- महाराष्ट्र दुकाने व आस्थापना (रोजगार व सेवा शर्त विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2025
- महाराष्ट्र कारागृह व सुधार सेवा विधेयक, 2025
सदन पटल पर रखे जाने वाले अध्यादेश – 3
- महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत व औद्योगिक नगरी (संशोधन) अध्यादेश, 2025
- महाराष्ट्र जिला परिषद व पंचायत समिति (संशोधन) अध्यादेश, 2025
- महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026
प्रस्तावित विधेयक – 10
- महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत व औद्योगिक नगरी (संशोधन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र जिला परिषद व पंचायत समिति (संशोधन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र बिना अनुदानित निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश व शुल्क विनियमन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र विनियोग विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र (पूरक) विनियोग विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र कर, ब्याज, शास्ति या विलंब शुल्क बकाया निपटान (संशोधन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र लिफ्ट, एस्केलेटर व मूविंग वॉक (संशोधन) विधेयक, 2026
- महाराष्ट्र निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
सरकार का दावा है कि यह बजट जनहितकारी होने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन पर भी केंद्रित रहेगा। वहीं विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा।




