जमीन का भी होगा ‘आधार’ कार्ड, 130 साल पुराने भूमि रिकॉर्ड्स का होगा कायाकल्प, नक्शे होंगे अपडेट

मुंबई- राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कृषि भूमि के नक्शों और सातबारा में मौजूद विसंगतियों को दूर करने के लिए राजस्व विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की विशेष पहल से राज्य की कृषि भूमि के उप-हिस्सों का नापजोख कर नक्शों और सातबारा को अपडेट करने का निर्णय लिया गया है।
इससे भूमि संबंधी लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी और प्रत्येक भूखंड को अब ‘भू-आधार’ क्रमांक प्रदान किया जाएगा। चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि राज्य में वर्ष 1890 से 1930 के बीच पहली भूमिमापन प्रक्रिया की गई थी। इसके बाद 1992 से दिसंबर 2024 तक खरीदी-बिक्री, वारिस हक और बंटवारे के कारण कुल 2,12,76,499 नये हिस्से तैयार हुए हैं।
हालांकि इन उप-हिस्सों का प्रत्यक्ष नापजोख नहीं होने के कारण सरकारी नक्शों और सातबारा में तालमेल नहीं बैठ पा रहा था। इस समस्या के समाधान के लिए अब पुणे स्थित जमाबंदी आयुक्त स्तर से ‘उप-हिस्सा नापजोख का पायलट प्रोजेक्ट’ शुरू किया जा रहा है।
आपसी विवाद होंगे कम
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक भूमि के टुकड़े को भू-आधार क्रमांक दिया जाएगा। आधार कार्ड की तरह ही भूमि से संबंधित समस्त जानकारी इस एक नंबर पर उपलब्ध होगी। इससे फसल बीमा, बैंकों से ऋण प्राप्त करना तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेना किसानों के लिए अधिक सरल हो जाएगा।भूमि का क्षेत्रफल और सीमाएं निश्चित होने से आपसी विवाद कम होंगे।
सातबारा उतारों के अनुसार वास्तविक स्थल का नक्शा उपलब्ध होगा। फसल बीमा और नुकसान भरपाई के लिए बैंकों को सटीक डिजिटल जानकारी मिलेगी और खरीद-बिक्री आसान व पारदर्शी होगी।इस परियोजना की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर अपर मुख्य सचिव (राजस्व) की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। वहीं जिला स्तर पर जिलाधिकारी और तहसील स्तर पर उप-विभागीय अधिकारी के नेतृत्व में समितियां साप्ताहिक समीक्षा करेंगी। इस कार्य के लिए निजी सर्वेक्षण एजेंसियों की सहायता भी ली जाएगी।

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