गवळी समाज के प्रदेशाध्यक्ष किशनराव हुंडीवाले हत्याकांड में 10 दोषियों को उम्रकैद, 5 बरी

अकोला-  जिले में गवळी समाज के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष किशनराव हुंडीवाले की नृशंस हत्या के बहुचर्चित मामले में आज न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया। इस प्रकरण में श्रीराम गावंडे समेत 10 आरोपियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई है, जबकि ठोस सबूतों के अभाव में 5 आरोपियों को बरी कर दिया गया है।

किशनराव हुंडीवाले 6 मई 2019 को एक मामले की सुनवाई के लिए अकोला स्थित धर्मदाय आयुक्त कार्यालय आए थे। दोपहर करीब 12 बजे शैक्षणिक संस्था और संपत्ति विवाद के चलते उनकी बेहद क्रूर तरीके से हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी।

इस मामले में सिविल लाइन पुलिस थाने में कुल 15 आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था। जांच की शुरुआत तत्कालीन पुलिस निरीक्षक विनोद ठाकरे ने की। बाद में बालापुर के सहायक पुलिस अधीक्षक सोहेल शेख, शहर उपविभागीय पुलिस अधिकारी उमेश माने-पाटील तथा पुलिस निरीक्षक रायटर उमेश पाटील ने आगे की जांच करते हुए एक हजार से अधिक दस्तावेजों की विस्तृत चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की।

सुनवाई के दौरान कुछ आरोपियों की संलिप्तता को लेकर ठोस और विश्वसनीय सबूत उपलब्ध न होने की बात न्यायालय के संज्ञान में आई। इस पर विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने संबंधित आरोपियों को बरी किए जाने का अनुरोध किया था।अंतिम फैसले में न्यायालय ने श्रीराम गावंडे, रणजीत गावंडे, विक्रम गावंडे, सूरज गावंडे, धीरज गावंडे, विशाल तायडे, सतीश तायडे, प्रतीक तोंडे, मयूर अहीर और दिनेश राजपूत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, प्रवीण श्रीराम गावंडे, मंगेश गावंडे, दिपाली गावंडे, नम्रता गावंडे और शेख साबीर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

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